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आ क॒लशे॑षु धावति श्ये॒नो वर्म॒ वि गा॑हते । अ॒भि द्रोणा॒ कनि॑क्रदत् ॥

English Transliteration

ā kalaśeṣu dhāvati śyeno varma vi gāhate | abhi droṇā kanikradat ||

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Pad Path

आ । क॒लशे॑षु । धा॒व॒ति॒ । श्ये॒नः । वर्म॑ । वि । गा॒ह॒ते॒ । अ॒भि । द्रोणा॑ । कनि॑क्रदत् ॥ ९.६७.१४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:67» Mantra:14 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:15» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:14


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (श्येनः) जैसे विद्युत् (वर्म) विग्रहवत् वस्तु का (विगाहते) अवगाहन करती है और (अभिद्रोणा) प्रत्येक विग्रहवद् वस्तु के अभिमुख (कनिक्रदत्) शब्दायमान होकर प्राप्त होती है। इस प्रकार (कलशेषु) प्रत्येक स्थान में (आधावति) आप विराजमान होते हैं ॥१४॥
Connotation: - विद्युत् निराकार होकर भी सबसे तेजस्वी, ओजस्वी और शब्दायमान है। इसी प्रकार निराकार परमात्मा तेजस्वी, ओजस्वी तथा शब्दयोनि होकर विराजमान है। यहाँ विद्युत् का दृष्टान्त अत्यन्त बल और निराकार के अभिप्राय से है, किसी और अभिप्राय से नहीं  ॥१४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'श्येनो वर्य विगाहते'

Word-Meaning: - [१] यह सोम (कलशेषु) = इन शरीर रूप कलशों में [सोलह कलाओं के निवास के स्थानों में] (आधावति) = समन्तात् गतिवाला होकर शुद्धि को करता है [धाव् गतिशुद्धयोः] । [२] (श्येनः) = शंसनीय गतिवाला यह सोम (वर्म विगाहते) = [ब्रह्म वर्म ममान्तरम्] ब्रह्मरूप कवच का अवगाहन करता है, अर्थात् यह सोम हमें उस प्रभु का दर्शन कराता है, जो हमारे कवच के रूप में हैं। [२] यह सोम (द्रोणा अभि) = इन शरीर रूप द्रोण पात्रों की ओर प्राप्त होता हुआ (कनिक्रदत्) = प्रभु का स्तवन करता है। अथवा प्रभु-स्तवन करता हुआ इन पात्रों को प्राप्त होता है। प्रभु-स्तवन ही सोमरक्षण का साधन बनता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमें शुद्ध करता है, प्रभु को प्राप्त कराता है, हमें स्तुति की वृत्तिवाला बनाता है।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - जगत्पूज्य परमात्मन् ! (श्येनः) यथा विद्युत् (वर्म) विग्रहवद्वस्तु (विगाहते) अवगाहते। तथा (अभिद्रोणा) प्रतिविग्रहवद्वस्तुनोऽभिमुखं (कनिक्रदत्) सशब्दं प्राप्नोति। इत्थं (कलशेषु) प्रत्येकस्थानेषु (आधावति) भवान् विराजितो भवति ॥१४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, spirit of light and passion fire, dives into the heart and imagination of the creative souls and, like the divine bird of flight and freedom, the eagle, breaks through the seal of mystery, speaking loud and bold into the poetic consciousness to reveal the secrets of existence.