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अग्ने॒ पव॑स्व॒ स्वपा॑ अ॒स्मे वर्च॑: सु॒वीर्य॑म् । दध॑द्र॒यिं मयि॒ पोष॑म् ॥

English Transliteration

agne pavasva svapā asme varcaḥ suvīryam | dadhad rayim mayi poṣam ||

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Pad Path

अग्ने॑ । पव॑स्व । सु॒ऽअपाः॑ । अ॒स्मे इति॑ । वर्चः॑ । सु॒ऽवीर्य॑म् । दध॑त् । र॒यिम् । मयि॑ । पोष॑म् ॥ ९.६६.२१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:66» Mantra:21 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:11» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:21


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! (पवस्व) आप हमको पवित्र करें। आप (स्वपाः) शोभन कर्मोंवाले हैं (अस्मे) हममें आप (वर्चः) ब्रह्मतेज दें और (मयि) मुझमें (रयिम्) ऐश्वर्य (सुवीर्यम्) और सुन्दर बल (पोषम्) तथा पुष्टि को (दधत्) धारण कराएँ ॥२१॥
Connotation: - जो पुरुष परमात्मपरायण होते हैं, परमात्मा उनमें सब प्रकार के ऐश्वर्यों को धारण कराता है ॥२१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वर्चस्- सुवीर्य - रयि

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (स्वपा:) = उत्तम कर्मोंवाले आप (अस्मे) = हमारे लिये (वर्चः) = तेज व (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति को (पवस्व) = प्राप्त कराइये । [२] आप (मयि) = मेरे में (पोषं रयिम्) = पालक धन को (दधत्) = धारण करिये। पालन-पोषण के पर्याप्त धन की मुझे कभी कमी न हो।
Connotation: - भावार्थ - हमें प्रभु कृपा से 'वर्चस् सुवीर्य व पोषण के लिये पर्याप्त धन की प्राप्ति हो ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (अग्ने) ज्ञानस्वरूप जगत्पालक परमात्मन् ! मां (पवस्व) पवित्रयतु। भवान् (स्वपाः) सुकर्मास्ति। (अस्मे) अस्मासु (वर्चः) ब्रह्मतेजो ददातु। अथ च (मयि) मयि (रयिम्) ऐश्वर्यं (सुवीर्यम्) सुन्दरं बलं (पोषम्) पुष्टिं च (दधत्) धारयतु ॥२१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, pray radiate and purify us. Lord of holy action, bless us with holy lustre, noble courage and virility. Bear and bring us wealth, honour and excellence with promotive health and nourishment.