यद॒द्भिः प॑रिषि॒च्यसे॑ मृ॒ज्यमा॑नो॒ गभ॑स्त्योः । द्रुणा॑ स॒धस्थ॑मश्नुषे ॥
English Transliteration
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yad adbhiḥ pariṣicyase mṛjyamāno gabhastyoḥ | druṇā sadhastham aśnuṣe ||
Pad Path
यत् । अ॒त्ऽभिः । प॒रि॒ऽसि॒च्यसे॑ । मृ॒ज्यमा॑नः । गभ॑स्त्योः । द्रुणा॑ । स॒धऽस्थ॑म् । अ॒श्नु॒षे॒ ॥ ९.६५.६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:6
| Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:2» Mantra:1
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:6
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यत्) जिस कारण से आप (अद्भिः) सत्कर्मों से (परिषिच्यसे) पूजित होते हैं, अतः (गभस्त्योः मृज्यमानः) स्वशक्तियों से जो शुद्ध हैं और (द्रुणा) अपनी शक्ति से (सधस्थं) जीवात्मा को (अश्नुषे) व्याप्त करते हैं ॥६॥
Connotation: - जो पुरुष सत्कर्म करता है, उसकी आत्मा को परमात्मा स्वशक्तियों से विभूषित करता है ॥६॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
द्रुणा सधस्थमनुषे
Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (यद्) = जब (अद्भिः) = कर्मों के द्वारा (परिषिच्यसे) = तू शरीर में ही चारों ओर सिक्त होता है, कर्मों में लगे रहने से, वासनाओं का आक्रमण न होने से सोम शरीर में ही सुरक्षित रहता है। यह सोम (गभस्त्योः) = बाहुवों में (मृज्यमानः) = सदा शुद्ध किया जाता है । 'बाह्र प्रयत्ने' यज्ञादि कर्मों को प्रयत्नपूर्वक करने में लगे रहने से ही सोम का शोधन होता है। [२] हे सोम ! तू (द्रुणा) = [द्रु गतौ] इस गतिशीलता के द्वारा ही अन्ततः (सधस्थम्) = उस परमात्मा के साथ स्थिति को (अनुषे) = प्राप्त करता है । सोम शरीर में सुरक्षित हुआ हुआ हमें गतिशील बनाता है और प्रभु को प्राप्त कराता
Connotation: - भावार्थ- कर्मों में लगे रहने से हम सोमरक्षण द्वारा अन्ततः प्रभु के साथ स्थित होते हैं ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यत्) येन कारणेन भवान् (अद्भिः) सत्कर्मभिः (परिषिच्यसे) पूजितो भवति अस्मात्कारणात् (गभस्त्योः मृज्यमानः) स्वशक्त्या शुद्धोऽस्ति। अथ च (द्रुणा) स्वशक्त्या (सधस्थं) जीवात्मानं (अश्नुषे) व्याप्तं करोति ॥६॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O soul of peace and purity, when you are honoured and anointed with the waters of divine sanctity, refined with the light of knowledge and tempered by yajnic fire, then by virtue of your own progress you attain to your real, innate and rightful position in society.
