आ प॑वस्व सु॒वीर्यं॒ मन्द॑मानः स्वायुध । इ॒हो ष्वि॑न्द॒वा ग॑हि ॥
English Transliteration
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ā pavasva suvīryam mandamānaḥ svāyudha | iho ṣv indav ā gahi ||
Pad Path
आ । पा॒व॒स्व॒ । सु॒ऽवीर्य॑म् । मन्द॑मानः । सु॒ऽआ॒यु॒ध॒ । इ॒हो इति॑ । सु । इ॒न्दो॒ इति॑ । आ । ग॒हि॒ ॥ ९.६५.५
Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:5
| Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:1» Mantra:5
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:5
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे सर्वप्रकाश परमात्मन् ! आप (सुवीर्यम्) हमारे पराक्रम को (आ पवस्व) सब प्रकार से पवित्र करें। (मन्दमानः) आप आनन्दस्वरूप हैं और (स्वायुधः) आप स्वयम्भू हैं। (इह उ) यहाँ ही (सु) भली-भाँति (आ गहि) हमको आकर अनुग्रहण करिये ॥५॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा के आह्वान करने का तात्पर्य स्वकर्माभिमुख करने का है अर्थात् आप हमारे कर्मों के अनुकूल फलप्रदान करें। परमात्मा सर्वव्यापक है, इसलिये एक स्थान से उठकर किसी दूसरे स्थान में जाना उसका नहीं हो सकता। इस प्रकार बुलाने का तात्पर्य सर्वत्र हृदयदेश में अवगत करने का समझना चाहिये, कुछ अन्य नहीं ॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
मन्दमान सोम
Word-Meaning: - [१] हे (स्वायुध) = उत्तम इन्द्रियों, मन व बुद्धि रूप आयुधोंवाले सोम (मन्दमानः) = हमें आनन्दित करता हुआ तू (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति को (आपवस्व) = सर्वथा प्राप्त करा। [२] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! (इह उ) = इस शरीर में ही (सु) = उत्तमता से (आगहि) = तू हमें प्राप्त हो ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम इन्द्रियों, मन व बुद्धि को उत्तम बनाता है ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे जगदीश्वर ! भवान् (सुवीर्यम्) अस्मत्पराक्रमं (आ पवस्व) सर्वथा पवित्रयतु। यतस्त्वं (मन्दमानः) आनन्दमूर्तिरसि। अथ च (स्वायुधः) भवान् स्वयम्भूरस्ति। (इह उ) अत्रैव (सु) सुतराम् (आ गहि) आगत्य मामनुगृहाण ॥५॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O divine spirit of peace, purity and abundance, joyous wielder of noble arms, come to us and let pure, creative courage and virility flow in abundance for us.
