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आ र॒यिमा सु॑चे॒तुन॒मा सु॑क्रतो त॒नूष्वा । पान्त॒मा पु॑रु॒स्पृह॑म् ॥

English Transliteration

ā rayim ā sucetunam ā sukrato tanūṣv ā | pāntam ā puruspṛham ||

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Pad Path

आ । र॒यिम् । आ । सु॒ऽचे॒तुन॑म् । आ । सु॒क्र॒तो॒ इति॑ सुऽक्रतो । त॒नूषु॑ । आ । पान्त॑म् । आ । पु॒रु॒ऽस्पृह॑म् ॥ ९.६५.३०

Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:30 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:6» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:30


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सुक्रतो) हे सर्वयज्ञाधिपते परमात्मन् ! आप (रयिम्) धन को (सुचेतुनं) और सुन्दर ज्ञान को (तनूषु) हमारी सन्तानों में (आ) सब प्रकार से दें। आप (पुरुस्पृहं) सबके उपास्य देव हैं। (पान्तं) सबको पवित्र करनेवाले हैं। (सुक्रतो) हे शोभन कर्मोंवाले परमात्मन् ! आप ही हमारे उपास्य देव हैं ॥३०॥
Connotation: - इस मन्त्र में नित्य-शुद्ध-बुद्ध-मुक्तस्वभाव सर्वरक्षक पतितपावन परमात्मा के गुणों का वर्णन किया गया है और उसको एकमात्र उपास्य देव माना है ॥३०॥ यह ६५ वाँ सूक्त और ६ वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रयि व सुचेतुना

Word-Meaning: - [१] हे (सुक्रतो) = उत्तम प्रज्ञान व शक्तिवाले सोम ! हम (तनूषु) = अपने शरीरों में तेरे (रयिम्) = ऐश्वर्य को (आ) [वृणीमहे] | = सब प्रकार से वरते हैं । तेरे (सुचेतुनम्) = उत्तम प्रज्ञान को (आ) = वरते हैं । [२] तुझे वरते हैं जो कि (पान्तम्) = हमारा रक्षण करता है और (पुरुस्पृहम्) = बहुतों से स्पृहणीय होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम, शरीर में सुरक्षित होने पर 'रयि व उत्तम चेतना' का कारण बनता है । इस सोम के रक्षण से शतशः वासनाओं का विखनन (नाश) करनेवाले 'शतं वैखानसाः' अगले सूक्त के ऋषि हैं—
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सुक्रतो) हे सर्वयज्ञाधिपते परमेश्वर ! भवान् (रयिम्) धनं तथा (सुचेतुनम्) शुभज्ञानं (तनूषु) मत्सन्ततिषु (आ) आ ददातु। भवान् (पुरुस्पृहम्) सर्वेषामुपास्यदेवोऽस्ति। तथा (पान्तं) सर्वपविता चास्ति। (सुक्रतो) हे शुभकर्मिन् ! भवानेव मयोपासनीयोऽस्ति ॥३०॥ इति पञ्चषष्टितमं सूक्तं षष्ठो वर्गश्च समाप्तः ॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord of holy action, we pray bring us the world’s wealth of enlightenment, protective, promotive and valued universally, for our body, mind and soul and vest it in our future generations.