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तं त्वा॑ सु॒तेष्वा॒भुवो॑ हिन्वि॒रे दे॒वता॑तये । स प॑वस्वा॒नया॑ रु॒चा ॥

English Transliteration

taṁ tvā suteṣv ābhuvo hinvire devatātaye | sa pavasvānayā rucā ||

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Pad Path

तम् । त्वा॒ । सु॒तेषु॑ । आ॒ऽभुवः॑ । हि॒न्वि॒रे । दे॒वऽता॑तये । सः । प॒व॒स्व॒ । अ॒नया॑ । रु॒चा ॥ ९.६५.२७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:27 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:6» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:27


ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (तं) उक्तगुणसम्पन्न (त्वा) आपको (सुतेषु) सुन्दर करनेवाले यज्ञों में (आभुवः) ऋत्विक् लोग (देवतातये) विघ्नों के विनाश के लिये (हिन्विरे) आपकी उपासना करते हैं। (सः) वह उक्तगुण सम्पन्न आप (अनया रुचा) पूर्वोक्त ज्ञान की शक्ति से (पवस्व) हमको पवित्र करें ॥१७॥
Connotation: - जो परमात्मा अपने ज्ञानप्रदीप से भक्तों के हृदय को पवित्र करते हैं, वे हमारे अन्तःकरण को पवित्र करें ॥१७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

कर्मठ ही सोम का रक्षण करते हैं

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (तं त्वा) = उस तुझ को (सुतेषु) = यज्ञों में (आभुवः) = समन्तात् होनेवाले, अर्थात् सदा यज्ञों में लगे रहनेवाले, श्रेष्ठतम कर्मों में प्रवृत्त लोग, (हिन्वरे) = अपने शरीरों में प्रेरित करते हैं। ऐसा होने पर (देवतातये) = तू दिव्यगुणों के विस्तार के लिये होता है । [२] (सः) = वह तू (अनया रुचा) = इस ज्ञानदीप्ति के साथ (पवस्व) = हमें प्राप्त हो ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण का उपाय 'यज्ञों में लगे रहना' है। रक्षित सोम हमें ज्ञानदीप्ति देता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (तं) पूर्वोक्तगुणसम्पन्नं (त्वा) भवन्तं (सुतेषु) सुयज्ञेषु (आभुवः) ऋत्विजः (देवतातये) विघ्नविनाशनाय (हिन्विरे) भवदुपासनां कुर्वते। (सः) स भवान् (अनया रुचा) प्रागुक्तज्ञानशक्त्या (पवस्व) अस्मान् पवित्रयतु ॥१७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - That lord of soma power and peace, the celebrants adore, exalt and glorify in their yajnic actions in the service of humanity and divinity. O lord, be pleased to accept this charming song of adoration, come, purify and sanctify us.