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ये सोमा॑सः परा॒वति॒ ये अ॑र्वा॒वति॑ सुन्वि॒रे । ये वा॒दः श॑र्य॒णाव॑ति ॥

English Transliteration

ye somāsaḥ parāvati ye arvāvati sunvire | ye vādaḥ śaryaṇāvati ||

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Pad Path

ये । सोमा॑सः । प॒रा॒ऽवति॑ । ये । अ॒र्वा॒ऽवति॑ । सु॒न्वि॒रे । ये । वा॒ । अ॒दः । श॒र्य॒णाऽव॑ति ॥ ९.६५.२२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:22 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:5» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:22


ARYAMUNI

अब सोम नामक परमेश्वर की उपासना करनेवाले विद्वानों के गुणों का वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (ये सोमासः) जो सौम्यस्वभाववाले विद्वान् (परावति) परब्रह्मरूप शक्ति में (ये) और जो (अर्वावति) प्रकृतिरूप शक्ति में (ये) जो (वा) और (अदः शर्यणावति) इस संसाररूप शक्ति में (सुन्विरे) निपुण किये गए हैं, इन सब विद्वानों को परमात्मा पवित्र करे ॥२१॥
Connotation: - इस मन्त्र का यह तात्पर्य है कि परमात्मा सब प्रकार के विद्वानों को पवित्र करता है।

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अर्वावति परावति-शर्यणावति

Word-Meaning: - [१] ये (सोमासः) = जो सोमकण हैं वे (परावति) = सुदूर द्युलोक के निमित्त, इस शरीर में मस्तिष्क ही द्युलोक है, उस मस्तिष्क के निमित्त (सुन्विरे) = उत्पन्न किये जाते हैं। सोम इस मस्तिष्क में ज्ञानाग्नि का ईंधन बनते हैं। [२] (ये) = जो सोमकण हैं वे (अर्वावति) = इस समीप के पृथिवीलोक के निमित्त उत्पन्न किये जाते हैं। इन सोमकणों से ही शरीररूप पृथिवीलोक नीरोग होकर दृढ़ बनता है । [३] (ये वा) = या ये जो सोमकण हैं वे (अदः) = उस (शर्यणावति) [शर्यणो अन्तरिक्षदेशः द० १ । ८४ । १४] = जिसमें वासनाओं का हिंसन किया गया है, उस हृदयान्तरिक्ष के निमित्त उत्पन्न किये जाते हैं। इन सोमकणों के द्वारा हृदय में वासनाओं का संहार होकर पवित्रता का सम्पादन होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमकण मस्तिष्क को ज्ञानाग्रिदीप्त, शरीर को सुदृढ़ तथा हृदय को वासना संहारवाला बनाते हैं ।

ARYAMUNI

अथ सोमसंज्ञकस्येश्वरस्योपासकानां विदुषां गुणा वर्ण्यन्ते ।

Word-Meaning: - (ये सोमासः) सौम्यस्वभाववन्त इमे विद्वांसः (परावति) परब्रह्मशक्तौ (ये) ये (अर्वावति) प्रकृतिशक्तौ तथा (ये) ये (वा अदः शर्यणावति) संसारशक्तावस्यां (सुन्विरे) ये कुशलास्तान् परमेश्वरः पवित्रयतु ॥२१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Whatever gifts of power and peace for humanity are created in the farthest nature or in this world of existence or in that unknown transcendent source of all that is in existence, all that, O Soma, lord of supreme power and unfathomable peace, bear and bring for us and our future generations.