अ॒प्सा इन्द्रा॑य वा॒यवे॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्य॑: । सोमो॑ अर्षति॒ विष्ण॑वे ॥
English Transliteration
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apsā indrāya vāyave varuṇāya marudbhyaḥ | somo arṣati viṣṇave ||
Pad Path
अ॒प्साः । इन्द्रा॑य । वा॒यवे॑ । वरु॑णाय । म॒रुत्ऽभ्यः॑ । सोमः॑ । अ॒र्ष॒ति॒ । विष्ण॑वे ॥ ९.६५.२०
Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:20
| Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:4» Mantra:5
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:20
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सोमः) सर्वपूज्य परमात्मा (इन्द्राय वायवे) कर्मयोगी विद्वानों के लिये (मरुद्भ्यः) पदार्थविद्यावेत्ता विद्वानों के लिये (वरुणाय) अपने विद्याबल से सबको आच्छादन करनेवाले विद्वान् के लिये और (विष्णवे) ज्ञानयोगी विद्वान् के लिये (अप्सा अर्षति) अपनी ज्ञानरूपी गति से प्राप्त होता है ॥२०॥
Connotation: - जो लोग ज्ञानयोग, कर्मयोग इत्यादि योगों से परमात्मा की आज्ञा का पालन करते हैं, उनको परमात्मा अपनी ज्ञानगति से अवश्यमेव प्राप्त होता है ॥२०॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सोमपायी 'इन्द्र, वायु, वरुण, मरुत् व विष्णु'
Word-Meaning: - [१] (अप्सा:) = [अपां संभक्ता] कर्मों का सेवन करनेवाला (सोमः) = सोम इन्द्राय (अर्षति) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये प्राप्त होता है। (वायवे) = क्रियाशील पुरुष के लिये प्राप्त होता है । जितेन्द्रियता के लिये क्रिया में लगे रहना ही साधन है। [२] (वरुणाय) = यह सोम पापों का निवारण करनेवाले के लिये प्राप्त होता है। कर्मों में लगे रहने से पाप दूर ही रहते हैं । पापों में फँसे और सोम का नाश हुआ। (मरुद्भ्यः) = यह सोम मितरावियों के लिये प्राप्त होता है, कर्मशील मितरावी होता ही है । [३] यह सोम (विष्णवे) = व्यापक मनोवृत्तिवाले के लिये प्राप्त होता है। व्यापकता व उदारता ही सब आसुरभावों को दूर रखती है। आसुरभाव दूर रहते हैं, तभी सोम का रक्षण होता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम का पान 'इन्द्र, वायु, वरुण, मरुत् व विष्णु' करते हैं ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सोमः) सर्वपूज्यः परमात्मा (इन्द्राय वायवे) गतिशीलकर्मयोगिविदुषे तथा (मरुद्भ्यः) पदार्थज्ञेभ्यः अथ च (वरुणाय) विद्याबलेन सर्वाच्छादकाय (विष्णवे) ज्ञानयोगिविदुषे (अप्सा अर्षति) स्वज्ञानरूपगत्या प्राप्तो भवति ॥२०॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Soma, spirit of the innate peace and power of divinity, by its own will and energy, radiates to the heart and soul of the devotee to vest it with the power of cosmic energy (Indra), the speed of winds (Vayu), pioneering spirit of the storm (Maruts), the depth of space (Varuna), and the love of omnipresent divinity (Vishnu).
