आ क॒लशा॑ अनूष॒तेन्दो॒ धारा॑भि॒रोज॑सा । एन्द्र॑स्य पी॒तये॑ विश ॥
English Transliteration
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ā kalaśā anūṣatendo dhārābhir ojasā | endrasya pītaye viśa ||
Pad Path
आ । क॒लशाः॑ । अ॒नू॒ष॒त॒ । इन्दो॒ इति॑ । धारा॑भिः । ओज॑सा । आ । इन्द्र॑स्य । पी॒तये॑ । वि॒श॒ ॥ ९.६५.१४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:14
| Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:3» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:14
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे सर्वप्रकाशक परमात्मन् ! आप (धाराभिः) आनन्द की वृष्टि द्वारा (इन्द्रस्य पीतये) कर्मयोगी की तृप्ति के लिये (कलशाः) उसके अन्तःकरण में (आ विश) सब ओर से प्रवेश करें और (ओजसा) अपने प्रकाश से कर्मयोगी को (अनूषत) विभूषित करें ॥१४॥
Connotation: - जो पुरुष कर्म करने में तत्पर रहते हैं अर्थात् उद्योगी हैं, परमात्मा उनको अपने प्रकाश से परमोद्योगी बनाता है ॥१४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सोम से पूर्ण अतएव स्तुत्य 'शरीर-कलश'
Word-Meaning: - [१] हे (इन्दो) = शक्ति को प्राप्त करानेवाले सोम ! (कलशाः) = ये 'प्राण' आदि सोलह कलाओं के आधारभूत शरीर (धाराभिः) = धारण- शक्तियों से तथा (ओजसा) = ओजस्विता से (आ अनूषत) = समन्तात् स्तुति किये जाते हैं यह सब स्तवन वस्तुतः सोम ! तेरा ही स्तवन है। यह शरीररूप कलश जब वीर्यरूप सोम से पूरित होता है, तभी इसमें सब अंगों का ठीक प्रकार से धारण होता है और यह ओजस्वितावाला होता है । [२] (इन्द्रस्य) = इस जितेन्द्रिय पुरुष के (पीतये) = रक्षण के लिये (आविश) = तू इसमें प्रवेशवाला हो, अर्थात् तेरा इसके शरीर में ही व्यापन हो ।
Connotation: - भावार्थ - यह शरीर कलश सोम से परिपूर्ण होने पर ही प्रशंसनीय होता है। यह सोम ही इसका रक्षण करता है।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) सर्वप्रकाशकर्तः परमात्मन् ! त्वं (धाराभिः) आमोदवृष्टिभिः (इन्द्रस्य पीतये) कर्मयोगिनस्तृप्तये (कलशाः) कर्मयोगिनामन्तःकरणेषु (आ विश) परितः प्रविश। अथ च (ओजसा) स्वप्रकाशेन कर्मयोगिनं (अनूषत) विभूषय ॥१४॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Indu, lord of light, peace and purity, grateful minds and souls await and adore you in hope and expectation. Pray come and bless them with showers of joyous power, grandeur and spiritual might for fulfilment of the soul.
