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वृषा॑ पवस्व॒ धार॑या म॒रुत्व॑ते च मत्स॒रः । विश्वा॒ दधा॑न॒ ओज॑सा ॥

English Transliteration

vṛṣā pavasva dhārayā marutvate ca matsaraḥ | viśvā dadhāna ojasā ||

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Pad Path

वृषा॑ । प॒व॒स्व॒ । धार॑या । म॒रुत्व॑ते । च॒ । म॒त्स॒रः । विश्वा॑ । दधा॑नः । ओज॑सा ॥ ९.६५.१०

Rigveda » Mandal:9» Sukta:65» Mantra:10 | Ashtak:7» Adhyay:2» Varga:2» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:10


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (वृषा) आप सब कामनाओं की वर्षा करनेवाले हैं। (धारया) आनन्द की वृष्टि से (पवस्व) हमको पवित्र करो। (मरुत्वते) ज्ञान और क्रियाकुशल विद्वानों के लिये (मत्सरः) आप आनन्दमय हैं (च) और (विश्वाः) सम्पूर्ण लोक-लोकान्तरों को (ओजसा) अपने आत्मिक बल से (दधानः) आप धारण किये हुए हो ॥१०॥
Connotation: - परमात्मा आनन्दस्वरूप है, उसमें दुःख का लेश भी नहीं। उसके आनन्द को ज्ञानी तथा विज्ञानी कर्मयोगी और ज्ञानयोगी ही पा सकते हैं, अन्य नहीं ॥१०॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मरुत्वते च मत्सरः

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू (वृषा) = शक्तिशाली है व सब सुखों का वर्षण करनेवाला है। तू (धारया) = अपनी धारण शक्ति के साथ हमें (पवस्व) = प्राप्त हो। (च) = और तू (मरुत्वते) = प्राणसाधना करनेवाले के लिये (मत्सरः) = आनन्द का संचार करनेवाला है। [२] (ओजसा) = ओजस्विता के साथ (विश्वा) = सब धनों को (दधान:) = तू हमारे अन्दर धारण करता है।
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना के द्वारा सुरक्षित सोम आनन्द का संचार करनेवाला है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे जगदीश्वर ! भवान् (वृषा) सर्वाभीष्टदातास्ति (धारया) स्वकीयानन्दवृष्ट्या (पवस्व) अस्मान् पवित्रय। (मरुत्वते) ज्ञानक्रियाकुशलानां विदुषां (मत्सरः) आमोददायकोऽस्ति। (च) अथ च (विश्वाः) सम्पूर्णानि लोकलोकान्तराणि (ओजसा) आत्मिकबलेन (दधानः) दधाति ॥१०॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lord of absolute abundance and creativity, sustainer of all worlds of existence by absolute power and grandeur, you are all bliss for the people of vibrancy, action and gratitude. Pray bring us showers of peace, purity and power for the good life.