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हि॒न्वा॒नो हे॒तृभि॑र्य॒त आ वाजं॑ वा॒ज्य॑क्रमीत् । सीद॑न्तो व॒नुषो॑ यथा ॥
English Transliteration
Mantra Audio
hinvāno hetṛbhir yata ā vājaṁ vājy akramīt | sīdanto vanuṣo yathā ||
Pad Path
हि॒न्वा॒नः । हे॒तृऽभिः॑ । य॒तः । आ । वाज॑म् । वा॒जी । अ॒क्र॒मी॒त् । सीद॑न्तः । व॒नुषः॑ । य॒था॒ ॥ ९.६४.२९
Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:29
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:41» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:29
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (हेतृभिः) उपासक लोगों से (हिन्वानः) उपासना किया हुआ परमात्मा (यतः) अपने प्रयत्न से (वाजी) सर्वोपरि बलवाला (वाजम्) बल को (अक्रमीत्) जीतता है (वनुषः) मनुष्य (सीदन्तः) युद्ध में प्रविष्ट होकर (यथा) जैसे अन्य बलों को जीतता है, इस प्रकार परमात्मा सब बलों को जीतता है ॥२९॥
Connotation: - परमात्मा ने इस मन्त्र में बल का उपदेश किया है कि जिस प्रकार योद्धा सेनापति अपने बल के गर्व से अन्य सेनाधीशों को जीतकर स्वाधीन कर लेता है, इसी प्रकार सर्वोपरि बलस्वरूप परमात्मा सम्पूर्ण लोक-लोकान्तरों को अपने वशीभूत किए हुए है ॥२९॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
वाजी वाजं अक्रमीत्
Word-Meaning: - [१] (हेतृभिः) = प्राणसाधना द्वारा शरीर में सोम को प्रेरित करनेवालों से (हिन्वानः) = शरीर में प्रेरित किया जाता हुआ, (यतः) = शरीर में संयत किया हुआ (वाजी) = यह शक्ति-सम्पन्न सोम (वाजं आ अक्रमीत्) = संग्राम में गतिवाला होता है। शरीरस्थ रोगकृमियों का संहार करता है और हृदयस्थ वासनाओं को भी विनष्ट करता है । [२] ये सोमकण शरीर में (सीदन्तः) = ऐसे आसीन होते हैं (यथा) = जैसे कि (वनुषः) = शत्रुओं का हिंसन करनेवाले योद्धा । ये रोगकृमि व वासनारूप शत्रुओं को विनष्ट करते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में प्रेरित सोम रोगों व वासनाओं से युद्ध करता हुआ उन्हें पराजित करता है।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (हेतृभिः) उपासकैः (हिन्वानः) उपासितः परमात्मा (यतः) स्वेन प्रयत्नेन (वाजी) उत्कृष्टबलवान् (वाजम्) बलं (अक्रमीत्) जयति (वनुषः) मनुष्यः (सीदन्तः) युद्धे प्रवेशं कृत्वा (यथा) येन प्रकारेणान्यानि बलान्यभिभवति तथैव जगदीश्वरः सर्वबलजेतास्ति ॥२९॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Just as a warrior spurred on by ambition and love of victory rushes to the field and wins the battle, and just as ardent yajakas sit on the vedi and win their object of yajna, so does the soul assisted by senses, mind and intelligential vision win the target of its meditation on Om, the presence of divinity.
