उ॒तो स॒हस्र॑भर्णसं॒ वाचं॑ सोम मख॒स्युव॑म् । पु॒ना॒न इ॑न्द॒वा भ॑र ॥
English Transliteration
Mantra Audio
uto sahasrabharṇasaṁ vācaṁ soma makhasyuvam | punāna indav ā bhara ||
Pad Path
उ॒तो इति॑ । स॒हस्र॑ऽभर्णसम् । वाच॑म् । सो॒म॒ । म॒ख॒स्युव॑म् । पु॒ना॒नः । इ॒न्दो॒ इति॑ । आ । भ॒र॒ ॥ ९.६४.२६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:26
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:41» Mantra:1
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:26
Reads 310 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (उतो) और (सहस्रभर्णसम्) अनेक प्रकार के भूषणों की शोभावाली (मखस्युवम्) जो विविध प्रकार के धनों को देनेवाली है, ऐसी (वाचम्) वाणी का (पुनानः) सबको पवित्र करनेवाले ! (सोम) परमात्मन् ! (इन्दो) हे सर्वप्रकाशक ! (आभर) हमको सब प्रकार से प्रदान करिये ॥२६॥
Connotation: - परमात्मा से प्रार्थना है कि उक्त प्रकार का विद्याभूषण हमको प्रदान करें ॥२६॥
Reads 310 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
मखस्युवम्
Word-Meaning: - [१] (उतो) = और हे सोम वीर्यशक्ते ! तू हमारे में (वाचं आभर) = उस वाणी का भरण कर, जो कि (सहस्रभर्णसम्) = हजारों प्रकार से हमारा भरण करनेवाली है और (मखस्युवम्) = हमारे साथ यज्ञों को जोड़नेवाली है। [२] (पुनानः) = पवित्र करता हुआ तू हे (इन्दो) = शक्तिशालिन् सोम ! (आभर) = हमारा समन्तात् भरण करनेवाला हो । सुरक्षित सोम हमारी सब कमियों को दूर करे।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें प्रभु की उस वाणी को प्राप्त कराता है जो कि हमारे जीवन को यज्ञशील बनाती है ।
Reads 310 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (उतो) अपि च (सहस्रभर्णसम्) बहुविधभूषणवतीं (मखस्युवम्) विविधविधैश्वर्य्यदायिनीं (वाचम्) वाणीं (पुनानः) सर्वपावक ! (सोम) हे परमात्मन् ! (इन्दो) हे सर्वप्रकाशक ! (आ भर) पूर्वोक्तवाण्याः प्रदानं करोतु ॥२६॥
Reads 310 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Indu, Soma, pure, purifying and sanctifying omnipresence of divinity, bear and bring us the divine voice of a thousand beauties, wealths and graces, the giver of infinite gifts of yajna.
