इन्द्रा॑येन्दो म॒रुत्व॑ते॒ पव॑स्व॒ मधु॑मत्तमः । ऋ॒तस्य॒ योनि॑मा॒सद॑म् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
indrāyendo marutvate pavasva madhumattamaḥ | ṛtasya yonim āsadam ||
Pad Path
इन्द्रा॑य । इ॒न्दो॒ इति॑ । म॒रुत्व॑ते । पव॑स्व । मधु॑मत्ऽतमः । ऋ॒तस्य॑ । योनि॑म् । आ॒ऽसद॑म् ॥ ९.६४.२२
Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:22
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:40» Mantra:2
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:22
Reads 334 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (मरुत्वते इन्द्राय) ज्ञानयोगी और कर्मयोगी के लिये (पवस्व) आप अपने आनन्द की वृष्टि करें। क्योंकि आप (मधुमत्तमः) आनन्दमय हैं, इसलिये उक्त विद्वानों को आप आनन्द का प्रदान करें और (ऋतस्य योनिमासदम्) यज्ञवेदी को आकर विभूषित करें ॥२२॥
Connotation: - परमात्मा कर्मयोगी और ज्ञानयोगी के हृदयमण्डप को विभूषित करता है और उनके सत्यव्रतात्मक यज्ञ को सदैव सुशोभित करता है ॥२२॥
Reads 334 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
मरुत्वते इन्द्राय मधुमत्तमः
Word-Meaning: - [१] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! तू (मरुत्वते) = प्रशस्त मरुतों [प्राणों] वाले, प्राणसाधना करनेवाले (इन्द्राय) = इस जितेन्द्रिय पुरुष के लिये पवस्व प्राप्त हो । (मधुमत्तमः) = तू इसके जीवन को अत्यन्त मधुर बनानेवाला है। [२] और अन्ततः ऋतस्य (योनिम्)= उस ऋत के उत्पत्ति- स्थान प्रभु को (आसदम्) = प्राप्त होने के लिये होता है । सोमरक्षण से ही हम दीप्त ज्ञानाग्निवाले सूक्ष्म बुद्धि बनकर प्रभु का दर्शन करते हैं।
Connotation: - भावार्थ - प्राणायाम हमें ऊर्ध्व-रेता बनाता है। इसी से हम प्रभु-दर्शन कर पाते हैं। एवं प्राण साधक जितेन्द्रिय पुरुष के लिये यह सोम मधुमत्तम है ।
Reads 334 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे परमैश्वर्यसम्पन्नपरमेश्वर ! (मरुत्वते इन्द्राय) ज्ञानयोगिने कर्मयोगिने च भवान् (पवस्व) स्वानन्दवृष्टिं करोतु। यतो भवान् (मधुमत्तमः) आनन्दमयोऽस्ति। अत एवोक्तविद्वज्जनेभ्य आनन्दप्रदानं करोतु। अथ च (ऋतस्य योनिमासदम्) यज्ञवेद्यामागत्य यज्ञं विभूषयतु ॥२२॥
Reads 334 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O Soma, enlightened joy of spiritual purity and bliss, flow into the consciousness of the vibrant soul of the devotee as an offering to Indra, lord of universal power and joy who abides at the heart of universal truth and law of existence.
