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आ यद्योनिं॑ हिर॒ण्यय॑मा॒शुॠ॒तस्य॒ सीद॑ति । जहा॒त्यप्र॑चेतसः ॥

English Transliteration

ā yad yoniṁ hiraṇyayam āśur ṛtasya sīdati | jahāty apracetasaḥ ||

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Pad Path

आ । यत् । योनि॑म् । हि॒र॒ण्यय॑म् । आ॒शुः । ऋ॒तस्य॑ । सीद॑ति । जहा॑ति । अप्र॑ऽचेतसः ॥ ९.६४.२०

Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:20 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:39» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:20


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यत्) जब (आशुः) अतिवेग गतिशील परमात्मा (ऋतस्य हिरण्ययं योनिं) हिरण्मयी यज्ञवेदी को (आसीदति) प्राप्त होता है, तब (अप्रचेतसः) असमाहित लोगों के अन्तःकरणों को (जहाति) छोड़ देता है ॥२०॥
Connotation: - तात्पर्य यह है कि ज्ञान से प्रकाशित अन्तःकरणों को परमात्मा अपनी शक्ति से विभूषित करता है, अज्ञानावृत अन्तःकरणों को नहीं, इसीलिये यहाँ “अप्रेचतसः जहाति” यह लिखा है। वास्तव में परमात्मा न किसी स्थान को छोड़ता है, न पकड़ता है ॥२०॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

जहाति अप्रचेतसः

Word-Meaning: - [१] यह (आशुः) = शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाला सोम (यद्) = जब (ऋतस्य) = ऋत के, सत्य के (हिरण्ययम्) = ज्योतिर्मय (योनिम्) = उत्पत्ति-स्थान में (आ सीदति) = सर्वथा स्थित होता है तो (अप्रचेतसः) = नासमझों को (जहाति) = यह छोड़ जाता है । [२] समझदार पुरुषों से ज्ञान-यज्ञ आदि में लगे रहने के द्वारा पवित्र किया जाता हुआ यह सोम उन्हें प्रभु को प्राप्त कराता है। नामसझ इस सोम के महत्त्व को न समझने के कारण वासनाओं में इसका विनाश कर बैठते हैं। |
Connotation: - भावार्थ - समझदार पुरुष सोमरक्षण से प्रभु को प्राप्त करते हैं । नासमझ शारीरिक भोगों में इसका व्यय कर बैठते हैं।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यत्) यदा (आशुः) अन्त्यन्तगतिशीलो जगदीश्वरः (ऋतस्य हिरण्ययं योनिम्) हिरण्मयीं यज्ञवेदीं (आसीदति) प्राप्नोति तदा (अप्रचेतसः) असमाहितजनानामन्तःकरणानि (जहाति) त्यजति ॥२०॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When the soul is established in the golden light of divinity which is the centre origin of the flow of existence, then without any delay it eliminates all junk of ignorance.