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म॒र्मृ॒जा॒नास॑ आ॒यवो॒ वृथा॑ समु॒द्रमिन्द॑वः । अग्म॑न्नृ॒तस्य॒ योनि॒मा ॥

English Transliteration

marmṛjānāsa āyavo vṛthā samudram indavaḥ | agmann ṛtasya yonim ā ||

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Pad Path

म॒र्मृ॒जा॒नासः॑ । आ॒यवः॑ । वृथा॑ । स॒मु॒द्रम् । इन्द॑वः । अग्म॑न् । ऋ॒तस्य॑ । योनि॑म् । आ ॥ ९.६४.१७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:17 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:39» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:17


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - उक्त परमात्मा (ऋतस्य योनिं) सत्यता के स्थान को (आ) भली-भाँति (अग्मन्) प्राप्त होता है। वह परमात्मा (मर्मृजानासः) सबको पवित्र करनेवाला है (आयवः) गतिशील है (इन्दवः) प्रकाशस्वरूप है तथा (वृथा समुद्रम्) अन्तरिक्ष में भी अनायास गमन करनेवाला है ॥१७॥
Connotation: - उक्त सर्वशक्तिसम्पन्न परमात्मा विना परिश्रम के ही अन्तरिक्षादि लोकों में गमन कर सकता है, अन्य नहीं ॥१७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मर्मृजानास आयवः

Word-Meaning: - [१] (मर्मृजानासः) = शुद्ध करते हुए, (आयवः) = [एति] शरीर में क्रियाशीलता को पैदा करते हुए (इन्दवः) = सोमकण (वृथा) = अनायास ही (समुद्रम्) = उस आनन्दमय प्रभु को (अग्मन्) = प्राप्त होते हैं । शरीर में सुरक्षित सोम हृदय के दृष्टिकोण से हमें पवित्र बनाता है, शरीर के दृष्टिकोण से गतिशील । [२] इस प्रकार हमें पवित्र व गतिशील बनाते हुए ये सोमकण (ऋतस्य योनिम्) = ऋत के उत्पत्ति-स्थान प्रभु में (आ) [अग्मन्] = ले जाते हैं। सोमरक्षण से हमारा जीवन ऋतमय बनता है, ऋत का वर्धन करते हुए हम 'ऋत के योनि' प्रभु को प्राप्त करते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम हमें हृदय में पवित्र बनाता है, शरीर में गतिशील। ऐसा बनाकर यह हमें प्रभु की ओर ले चलता है ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - पूर्वोक्तः परमात्मा (ऋतस्य योनिम्) सत्यतायाः स्थानं (आ) समन्तात् (अग्मन्) प्राप्नोति। स परमेश्वरः (मर्मृजानासः) सर्वपवित्रकर्तास्ति। अथ च (आयवः) गमनशीलोऽस्ति। (इन्दवः) प्रकाशस्वरूपस्तथा (वृथा समुद्रम्) अन्तरिक्षेऽप्यनायासेन गच्छति ॥१७॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Purified and sanctified devotees, bright, clear and radiant, spontaneously concentrate on the infinite oceanic presence of divinity and reach the central origin of the moving universe and the dynamics of existence.