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पु॒ना॒नो दे॒ववी॑तय॒ इन्द्र॑स्य याहि निष्कृ॒तम् । द्यु॒ता॒नो वा॒जिभि॑र्य॒तः ॥

English Transliteration

punāno devavītaya indrasya yāhi niṣkṛtam | dyutāno vājibhir yataḥ ||

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Pad Path

पु॒ना॒नः । दे॒वऽवी॑तये॑ । इन्द्र॑स्य । या॒हि॒ । निः॒ऽकृ॒तम् । द्यु॒ता॒नः । वा॒जिऽभिः॑ । य॒तः ॥ ९.६४.१५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:64» Mantra:15 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:38» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:15


ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! आप (इन्द्रस्य) कर्मयोगी को (देववीतये) ब्रह्मप्राप्ति के लिये (याहि) प्राप्त हों। (यतः) क्योंकि आप (निष्कृतं द्युतानः) स्वाभाविक दीप्तिमान् हैं तथा (वाजिभिः) उपासक लोगों से उपासना किये जाते हैं और (पुनानः) सबको पवित्र करते हैं, इसलिये कर्मयोगी का लक्ष्य आप ही बनें ॥१५॥
Connotation: - कर्मयोगी यहाँ उपलक्षणमात्र है। तात्पर्य यह है कि कर्मयोगी तथा ज्ञानयोगी अथवा अन्य कोई उपासक हो, इन सबको एकमात्र ईश्वर की ही उपासना करनी चाहिये, किसी अन्य की नहीं ॥१५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

पुनानः- द्युमान:

Word-Meaning: - [१] (पुनानः) = पवित्र किया जाता हुआ तू, हे सोम ! देववीतये - दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिये हो । दिव्य गुणों को प्राप्त कराता हुआ तू (इन्द्रस्य) = जितेन्द्रिय पुरुष के (निष्कृतम्) = पवित्र किये हुए हृदय को (याहि) = प्राप्त हो । वस्तुतः सोमरक्षण से ही हृदय की पवित्रता सिद्ध होती है और हमारे जीवनों में दिव्य गुणों का विकास होता है । जितेन्द्रियता सोमरक्षण का प्रमुख साधन है । [२] हे सोम ! तू (द्युतान:) = ज्ञान का विस्तार करनेवाला है, और (वाजिभिः) = [ वज् गतौ ] गतिशील पुरुषों से (यतः) = संयत किया जाता है। सदा गति में रहनेवाले क्रियाशील पुरुष ही वासनाओं से बच पाते हैं और सोम का रक्षण करनेवाले होते हैं ।
Connotation: - भावार्थ-रक्षित हुआ हुआ सोम हमारे जीवन को पवित्र व प्रकाशमय बनाता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! भवान् (इन्द्रस्य) कर्मयोगिनः (देववीतये) ब्रह्मप्राप्तये (याहि) प्राप्तो भवतु (यतः) यस्मात् कारणात् त्वं (निष्कृतं द्युतानः) स्वाभाविकदीप्तिमानसि। तथा (वाजिभिः) उपासकैरुपास्यमानोऽसि। अथ च (पुनानः) सर्वान् पवित्रयसि। अतस्त्वमेव कर्मयोगिनो लक्ष्यतां प्राप्नुहि ॥१५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Purified, bright and clear Soma, songs of adoration for service of divinity, go upto the presence of Indra, lord omnipotent. Shining powerful, sent up, inspired by enthusiastic celebrants, rise up to divinity.