Go To Mantra
Viewed 445 times

पव॑मान ऋ॒तः क॒विः सोम॑: प॒वित्र॒मास॑दत् । दध॑त्स्तो॒त्रे सु॒वीर्य॑म् ॥

English Transliteration

pavamāna ṛtaḥ kaviḥ somaḥ pavitram āsadat | dadhat stotre suvīryam ||

Mantra Audio
Pad Path

पव॑मानः । ऋ॒तः । क॒विः । सोमः॑ । प॒वित्र॑म् । आ । अ॒स॒द॒त् । दध॑त् । स्तो॒त्रे । सु॒ऽवीर्य॑म् ॥ ९.६२.३०

Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:30 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:29» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:30


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमान) हे सबके रक्षक ! आप (ऋतः) सत्यता को धारण करनेवाले (कविः) विद्वान् (सोमः) उदार हैं और (स्तोत्रे सुवीर्यम् दधत्) अपने स्तोताओं तथा अनुयायियों के लिये सुन्दर पराक्रम को धारण करते हुए (पवित्रम् आसदत्) सत्कर्मी तथा सुरक्षित करते हैं ॥३०॥
Connotation: - इस मन्त्र में राजधर्म की रक्षार्थ परिश्रमी बनने के लिये ईश्वर से प्रार्थना की गई है ॥३०॥ यह ६२ वाँ सूक्त और २९ वाँ वर्ग समाप्त हुआ।

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'पवमानः ऋतः कविः '

Word-Meaning: - [१] (सोमः) = सोम (पवित्रं आसदत्) = पवित्र हृदय पुरुष में आसीन होता है। हृदय की पवित्रता के होने पर यह शरीर में सुरक्षित होता है। शरीर में सुरक्षित हुआ हुआ यह (पवमानः) = हमारे जीवन को पवित्र करता है । (ऋतः) = यह हमारे जीवन को सत्यमय बनाता है। (कविः) = यह हमें क्रान्तप्रज्ञ बनाता है। [२] शरीर में सुरक्षित होने पर यह सोम (स्तोत्रे) = स्तोता के लिये (सुवीर्यं दधत्) = उत्कृष्ट वीर्य को धारण करता है। इस वीर्य के द्वारा ही यह सोम का स्तवन करनेवाला पुरुष शक्तिशाली बनता हुआ रोगों को भी जीतनेवाला बनता है और वासनाओं से भी ऊपर उठ पाता है।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम हमें 'पवित्र, सत्यमय व क्रान्तप्रज्ञ' बनाता है। हमारे लिये उत्कृष्ट शक्ति को धारण करता है । इस प्रकार सोमरक्षण से यह व्यक्ति 'निध्रुवि' = नितरां ध्रुव स्थितप्रज्ञ बनता है, 'काश्यप' - ज्ञानी होता है। इस 'निध्रुवि काश्यप' का ही अगला सूक्त है-

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमान) हे जगद्रक्षक ! भवान् (ऋतः) सत्यशीलः (कविः) पण्डितः (सोमः) उदारचित्तोऽस्ति। अथ च (स्तोत्रे सुवीर्यं दधत्) स्वीयस्तोतॄन् अनुयायिवर्गांश्च पराक्रमशीलान् कुर्वन् (पवित्रे आसदत्) सत्कर्मी करोति सुरक्षति च ॥३०॥ इति द्विषष्टितमं सूक्तमेकोनत्रिंशो वर्गश्च समाप्तः।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May Soma, pure, purifying and energising, eternal Truth, omniscient creator, peaceful and blissful, come and bless the pure heart and soul of the devotee vesting the song and spirit with strength and holy passion.