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आ न॒: सोमं॑ प॒वित्र॒ आ सृ॒जता॒ मधु॑मत्तमम् । दे॒वेभ्यो॑ देव॒श्रुत्त॑मम् ॥

English Transliteration

ā naḥ somam pavitra ā sṛjatā madhumattamam | devebhyo devaśruttamam ||

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Pad Path

आ । नः॒ । सोम॑म् । प॒वित्रे॑ । आ । सृ॒जत॑ । मधु॑मत्ऽतमम् । दे॒वेभ्यः॑ । दे॒व॒श्रुत्ऽत॑मम् ॥ ९.६२.२१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:21 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:28» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:21


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे विद्वानों ! तुम (नः) हम लोगों के (सोमम्) सौम्य स्वभाववाले स्वामी को (आ सृजत) इस प्रकार सिद्ध करो, जिससे (मधुमत्तमम्) मधुर स्वभाववालों में उत्तम हो और (देवेभ्यः देवश्रुत्तमम्) सब देवों अर्थात् विद्वानों की प्रार्थना सुननेवाला हो ॥२१॥
Connotation: - हे प्रजाजनों ! तुम ऐसे सेनापति वरण करो, जो मधुर स्वभाववाला हो और सबकी प्रार्थनाओं पर ध्यान देनेवाला हो ॥२१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

मधुमत्तम- देवश्रुत्तम

Word-Meaning: - [१] प्रभु कहते हैं कि हे जीवो! तुम (नः) = हमारे (सोमम्) = इस सोम को (पवित्रे) = पवित्र हृदय में (आसृजत) = सर्वथा उत्पन्न करो । हृदय की पवित्रता के होने पर ही यह शरीर में सुरक्षित रहता है। [२] उस सोम को तुम अपने में पैदा करो, जो कि (मधुमत्तमम्) = जीवन को अत्यन्त मधुर बनानेवाला है तथा (देवेभ्यः) = देववृत्तिवाले पुरुषों के लिये (देवश्रुतमम्) = उस महान् देव की वाणी को, इस ज्ञान की वाणी को अधिक से अधिक सुननेवाला है। अर्थात् इस सोम से प्रथम तो जीवन मधुर बनता है, दूसरे इसका रक्षक पुरुष ज्ञान की रुचि के उत्पन्न होने से प्रभु की वाणी को सुननेवाला होता है ।
Connotation: - भावार्थ- हृदय को पवित्र बनाकर सोम के रक्षण से हमारा जीवन मधुर व ज्ञान प्रवण [ज्ञान की ओर झुकाववाला] बने ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे पण्डिताः ! यूयं (नः) अस्माकं (सोमम्) सौम्यस्वभाववन्तं स्वामिनं (आ सृजत) इत्थं साधयत यथा (मधुमत्तमम्) मधुरप्रकृतिषूत्तमो भवतु। अथ च (देवेभ्यः देवश्रुत्तमम्) विद्वज्जनप्रार्थनां शृणोतु ॥२१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O performers and partners of humanity’s yajnic social order, create, preserve and extend our soma of the nation’s joy, beauty and grace, sweetest honeyed soma ever heard of by the divinities, on the sacred earth in honour of the holiest of holies.