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आ त॑ इन्दो॒ मदा॑य॒ कं पयो॑ दुहन्त्या॒यव॑: । दे॒वा दे॒वेभ्यो॒ मधु॑ ॥
English Transliteration
Mantra Audio
ā ta indo madāya kam payo duhanty āyavaḥ | devā devebhyo madhu ||
Pad Path
आ । ते॒ । इ॒न्दो॒ इति॑ । मदा॑य । कम् । पयः॑ । दु॒ह॒न्ति॒ । आ॒यवः॑ । दे॒वाः । दे॒वेभ्यः॑ । मधु॑ ॥ ९.६२.२०
Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:20
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:27» Mantra:5
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:20
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे परमैश्वर्यशालिन् ! (ते) आपके (मदाय) आनन्द के लिये (आयवः देवाः) दिव्य शक्तिवाले आपके अनुयायी लोग (देवेभ्यः) ज्ञानक्रियाशाली विद्वानों से (मधु) सुन्दर भोग योग्य (पयः) दूध रूपी (कम्) सुख को (आ) भली-भाँति (दुहन्ति) दुहते हैं ॥२०॥
Connotation: - हे परमात्मन् ! आपके अनुयायी लोग कामधेनुरूप पृथिव्यादिलोक-लोकान्तरों से अनन्त प्रकार के अमृतों को दुहते हैं ॥२०॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
देवेभ्यः मधु
Word-Meaning: - [१] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! (आयवः) = [एति इति आयुः ] गतिशील पुरुष (मदाय) = आनन्द व उल्लास की प्राप्ति के लिये (ते) = तेरी (कं पयः) = आनन्दप्रद आप्यायन शक्ति को (आदुहन्ति) = अपने में प्रपूरित करते हैं। सोमरक्षण का सब से प्रमुख साधन कर्मों में लगे रहना ही है । न खाली हों और न वासनायें हमारे पर आक्रमण करें। वासनाओं के आक्रमण से ही तो सोम का विनाश होता है । इस प्रकार क्रिया में लगे रहकर यदि हम सोम का रक्षण करते हैं, तो जीवन में एक अद्भुत उल्लास को पाते हैं । [२] (देवा:) = हे देववृत्ति के पुरुषो! [दिव् विजिगीषायां ] वासनाओं को जीतने की कामनावाले पुरुषो! यह सोम (देवेभ्यः) = सब इन्द्रियों के लिये (मधु) = अत्यन्त सारभूत उत्कृष्ट वस्तु है । यही सब इन्द्रियों को सशक्त बनानेवाला है ।
Connotation: - भावार्थ- सोम जीवन में उल्लास को देता है, यह इन्द्रियों को सशक्त बनाता है ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे परमैश्वर्यशालिन् ! (ते) भवतः (मदाय) आनन्दाय (आयवः देवाः) दिव्यशक्तिमन्तो भवदनुयायिनो जनाः (देवेभ्यः) ज्ञानक्रियाशालिभिः विद्वद्भिः (मधु) सुभोग्यं (पयः) दुग्धरूपं (कम्) सुखं (आ) समन्तात् (दुहन्ति) दुहते ॥२०॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O lord of peace, grace and joy, to your pleasure and the pleasure of holy powers, the people and the noblest brilliant people of the land create and distil the sweets and sanatives of peace and nourishment from the life around.
