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तं त्रि॑पृ॒ष्ठे त्रि॑वन्धु॒रे रथे॑ युञ्जन्ति॒ यात॑वे । ऋषी॑णां स॒प्त धी॒तिभि॑: ॥

English Transliteration

taṁ tripṛṣṭhe trivandhure rathe yuñjanti yātave | ṛṣīṇāṁ sapta dhītibhiḥ ||

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Pad Path

तम् । त्रि॒ऽपृ॒ष्ठे । त्रि॒ऽब॒न्धु॒रे । रथे॑ । यु॒ञ्ज॒न्ति॒ । यात॑वे । ऋषी॑णाम् । स॒प्त । धी॒तिऽभिः॑ ॥ ९.६२.१७

Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:17 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:27» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:17


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ऋषीणाम् सप्त धीतिभिः) जो कि ऋषियों अर्थात् विज्ञानी शिल्पियों के द्वारा रचित है तथा सात प्रकार के आकर्षणादि गुणों से संयुक्त है तथा (त्रिपृष्टे) तीन उपवेशन स्थानों से युक्त तथा (त्रिवन्धुरे) तीन जगह ऊँचा नीचा है, (रथे) ऐसे रथ में (तम्) उस सेनापति को (यातवे युञ्जन्ति) यात्रा करने के लिये प्रयुक्त करते हैं ॥१७॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करता है कि हे पुरुषों ! तुम अपने सेनापतिओं के लिये ऐसे यान बनाओ, जो अनन्त प्रकार के आकर्षण-विकर्षणादि गुणों से युक्त हों और जल, स्थल तथा नभमण्डल में सर्वत्रैव अव्याहतगति होकर गमन कर सकें ॥१७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'स्वस्थ सुन्दर' शरीर-रथ

Word-Meaning: - [१] यह शरीर - रथ 'वात-पित्त-कफ' रूप तीन पृष्ठों [आधारों] वाला होने से 'त्रिपृष्ठ ' कहाता है। यह उत्तम 'इन्द्रियों, मन व बुद्धि' रूप स्थिति स्थानोंवाला होने से 'त्रिवन्धुर' कहलाता है, तीन सुन्दर स्थानोंवाला [वन्धुर-beautiful ] । इस (त्रिपृष्ठे) = तीन पृष्ठोंवाले, (त्रिवन्धुरे) = तीन सुन्दर स्थानोंवाले (रथे) = शरीर रथ में (तम्) = उस सोम को (युञ्जन्ति) = युक्त करते हैं। इस सोम को विनष्ट होने से बचाकर शरीर में ही सुरक्षित करते हैं। इसे शरीर रथ में इसलिए सुरक्षित करते हैं कि (यातवे) = इसके द्वारा वे प्रभु की ओर जाने के लिये समर्थ हों। [२] इस सोम को वे (ऋषीणाम्) = मन्त्रद्रष्टाओं की, ज्ञानी पुरुषों की (सप्त धीतिभिः) = [ धीति devotion] सात छन्दों से युक्त वेदवाणियों से होनेवाली उपासनाओं के द्वारा शरीर रथ में युक्त करते हैं । वस्तुतः प्रभु की उपासना ही सोम को शरीर में सुरक्षित करने का प्रमुख साधन है। शरीर में सुरक्षित हुआ-हुआ सोम शरीर - रथ को 'त्रिपृष्ठ व त्रिवन्धुर' बनाता है। यह रथ हमें प्रभु प्राप्ति के मार्ग पर ले चलता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण द्वारा हम इस शरीर - रथ को दृढ़ व सुन्दर बनायें। सात छन्दों द्वारा होनेवाली उपासनायें ही सोमरक्षण का साधन बनती हैं। ऐसा होने पर यह शरीर रथ हमें प्रभु की ओर ले चलता है ।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ऋषीणाम् सप्त धीतिभिः) यो हि ऋषिभिः “विज्ञानिशिल्पिभिरिति यावत्” रचितः सप्तविधकर्म- परिपूर्णः तथा (त्रिपृष्ठे) उपवेशनस्थानत्रययुक्तः (त्रिवन्धुरे) त्रिषु उच्चैः नीचैः वर्तते (रथे) एवम्भूते रथे (तम्) तं सेनापतिं (यातवे युञ्जन्ति) यात्रार्थं प्रयुञ्जन्ति ॥१७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Him they enjoin to the three-level, triple structural chariot of the nation, with sevenfold intelligence, will and execution of the visionaries of life.