Go To Mantra
Viewed 368 times

स॒हस्रो॑तिः श॒ताम॑घो वि॒मानो॒ रज॑सः क॒विः । इन्द्रा॑य पवते॒ मद॑: ॥

English Transliteration

sahasrotiḥ śatāmagho vimāno rajasaḥ kaviḥ | indrāya pavate madaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

स॒हस्र॑ऽऊतिः । श॒तऽम॑घः । वि॒ऽमानः॑ । रज॑सः । क॒विः । इन्द्रा॑य । प॒व॒ते॒ । मदः॑ ॥ ९.६२.१४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:14 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:26» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:14


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्राय) वह सेनापति इन्द्र अर्थात् सर्वोपरि ऐश्वर्यसम्पन्न होने के लिये (सहस्रोतिः) सहस्रों प्रकार की रक्षणशक्ति को धारण करता है और (शतामघः) सैकड़ों प्रकार के धनों का संचय करता है (विमानः रजसः) और प्रजारक्षणार्थ रजोगुणप्रधान होता है (कविः) सब शास्त्रों का प्राज्ञ तथा (इन्द्राय मदः) विज्ञानियों का सत्कर्ता और तृप्तिकर्ता तथा (पवते) उनकी विशेषरूप से रक्षा करता है ॥१४॥
Connotation: - जो विद्वानों का रक्षक तथा सत्कार करनेवाला और विद्या के प्रचार में प्रेमी होता है, वही सेनापति प्रशंसित कहा जाता है ॥१४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'शतामघः' [सोम]

Word-Meaning: - [१] (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (मदः) = यह उल्लास का जनक सोम (पवते) = प्राप्त होता है । जितेन्द्रियता सोमरक्षण का साधन है और रक्षित हुआ हुआ सोम आनन्द व उल्लास को जन्म देता है । [२] यह सोम (सहस्त्रोतिः) = हजारों प्रकार से हमारा रक्षण करनेवाला है। (शतामघ:) = सैंकड़ों ऐश्वर्योंवाला है, यह जीवन के अन्दर शतशः ऐश्वर्यों को जन्म देता है। वस्तुतः अन्नमय आदि सब कोशों को यही उस-उस ऐश्वर्य से परिपूर्ण करता है, यही (रजसः विमान:) = [ रजः कर्मणि भारत गी०] सब गति का विशेष मानपूर्वक बनानेवाला है । सोम ही हमें स्फूर्तिमय जीवनवाला बनाता है । (कविः) = यह हमें क्रान्तप्रज्ञ बनाता है। संक्षेप में यह सोम ही गति व ज्ञान को पैदा करता है ।
Connotation: - भावार्थ- शरीर में सुरक्षित सोम शरीर का रक्षण करता है, इसे सब ऐश्वर्यों से परिपूर्ण करता है । यही हमें गति व ज्ञान से युक्त करता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्द्राय) स सेनापतिः महदैश्वर्यप्राप्तये (सहस्रोतिः) सहस्रशः शक्तीर्दधाति। तथा (शतामघः) अनेकप्रकारेण धनं सञ्चिनुते। तथा (विमानः रजसः) प्रजारक्षणाय रजोगुणप्रधानो भवति। अथ च (कविः) सर्वशास्त्रमर्मवित् तथा (इन्द्राय मदः) विज्ञानिनां सत्कारकर्ता तृप्तिकर्ता च (पवते) विशेषं गोपायति ॥१४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, divine spirit and power of a thousand ways of protection, a hundred modes of wealth and power, commanding controller of the energies of life, visionary creator of beauty and poetry, is dynamic, ever fluent, and it creates and releases joy and ecstasy for the honour of Indra, glory of the human social order.