ए॒ष स्य परि॑ षिच्यते मर्मृ॒ज्यमा॑न आ॒युभि॑: । उ॒रु॒गा॒यः क॒विक्र॑तुः ॥
English Transliteration
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eṣa sya pari ṣicyate marmṛjyamāna āyubhiḥ | urugāyaḥ kavikratuḥ ||
Pad Path
ए॒षः । स्यः । परि॑ । सि॒च्य॒ते॒ । म॒र्मृ॒ज्यमा॑नः । आ॒युऽभिः॑ । उ॒रु॒ऽगा॒यः । क॒विऽक्र॑तुः ॥ ९.६२.१३
Rigveda » Mandal:9» Sukta:62» Mantra:13
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:26» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:13
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः स्यः) वह यह (कविक्रतुः) जो कि विद्वानों में श्रेष्ठ और (उरुगायः) सब लोगों से प्रशंसित है, ऐसा सेनापति (आयुभिः) सब प्रजाओं द्वारा (मर्मृज्यमानः) शुद्धाचरणरूप से सिद्ध किया गया (परिषिच्यते) नेतृत्व पद पर अभिषिक्त किया जाता है ॥१३॥
Connotation: - परमात्मा उपदेश करता है कि जो उक्तगुणसम्पन्न पुरुष है, वही सेनापति के पद पर नियुक्त करना चाहिये ॥१३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
उरुगायः कविक्रतुः
Word-Meaning: - [१] (एषः) = यह (स्यः) = यह सोम उल्लिखित मन्त्र के अनुसार रयि को देनेवाला सोम (आयुभिः) = गतिशील पुरुषों से [एति इति] (मर्मृज्यमानः) = शुद्ध किया जाता हुआ (परिषिच्यते) = शरीर में चारों ओर अंग-प्रत्यंग में सिक्त होता है। क्रियाशीलता के होने पर हम वासनाओं द्वारा सताये जाने से बचे रहते हैं। वासनाओं के अभाव में सोम शुद्ध बना रहता है। शुद्ध सोम शरीर में ही व्यापनवाला होता है। [२] यह सोम (उरुगाय:) = खूब ही शंसनीय होता है, अथवा हमें शंसनीय जीवनवाला बनाता है और (कविक्रतुः) = यह क्रान्तप्रज्ञ होता है। सुरक्षित सोम हमारी बुद्धि को सूक्ष्म बनाता है।
Connotation: - भावार्थ - गतिशीलता के द्वारा शुद्ध बना हुआ सोम शरीर में सिक्त होता है। यह हमें प्रशस्त जीवनवाला व क्रान्तप्रज्ञ बनाता है ।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (एषः स्यः) सोऽसौ (कविक्रतुः) यो हि विद्वत्सु श्रेष्ठः तथा (उरुगायः) सर्वजनैः प्रशंसितः एवं भूतः सेनापतिः (आयुभिः) समस्तप्रजाभिः (मर्मृज्यमानः) शुद्धाचरणेन सिद्धः (परिषिच्यते) नेतृत्वपदे अभिषिच्यते ॥१३॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Such is Soma, spirit of life’s beauty and glory, that flows pure, purifying and sanctifying on top, exalted and glorified by celebrant humanity, universally admired as poetic visionary, creator and harbinger of holiest glory.
