पव॑मानस्य ते व॒यं प॒वित्र॑मभ्युन्द॒तः । स॒खि॒त्वमा वृ॑णीमहे ॥
English Transliteration
Mantra Audio
pavamānasya te vayam pavitram abhyundataḥ | sakhitvam ā vṛṇīmahe ||
Pad Path
पव॑मानस्य । ते॒ । व॒यम् । प॒वित्र॑म् । अ॒भि॒ऽउ॒न्द॒तः । स॒खि॒ऽत्वम् । आ । वृ॒णी॒म॒ह्चे ॥ ९.६१.४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:61» Mantra:4
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:18» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:4
Reads 368 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमानस्य) अपने आश्रित जनों को पवित्र करते हुए (पवित्रम् अभ्युदयन्तः) और पवित्र किये हुए मनुष्य को उत्साहित करनेवाले (ते) तुम्हारे (सखित्वम्) मैत्रीभाव के लिये (वयम्) हम लोग (आवृणीमहे) प्रार्थना करते हैं ॥४॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा के सद्गुणों को धारण करके परमात्मा के साथ मैत्री भाव का वर्णन किया गया है ॥४॥
Reads 368 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सोम सखित्व- वरण
Word-Meaning: - [१] हे सोम! (पवित्रम्) = पवित्र हृदयवाले पुरुष को (अभ्युन्दतः) = शक्ति से सिक्त करते हुए, (पवमानस्य) = जीवन को पवित्र बनानेवाले (ते) = तेरे (सखित्वम्) = मित्रभाव को (वयम्) = हम (आवृणीमहे) = वरते हैं । [२] हम सोम के सखा बनते हैं। यह सोम का सखित्व हमें शक्ति से सिक्त करेगा और पवित्र जीवनवाला बनायेगा ।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमें शक्ति सिक्त करता है तथा पवित्र बनाता है।
Reads 368 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमानस्य) स्वाश्रितजनान् पवित्रयन् (पवित्रम्) पूतमनुष्यस्य (अभ्युन्दतः) उत्साहकर्तुः (ते) तव (सखित्वम्) मैत्रीकरणाय (वयम्) वयं (आवृणीमहे) प्रार्थयामः ॥४॥
Reads 368 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O Soma, pure and purifying lord and ruler of life, the streams of your peace, plenty and piety overflow. We pray for abiding love and friendship with you.
