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यस्ते॒ मदो॒ वरे॑ण्य॒स्तेना॑ पव॒स्वान्ध॑सा । दे॒वा॒वीर॑घशंस॒हा ॥

English Transliteration

yas te mado vareṇyas tenā pavasvāndhasā | devāvīr aghaśaṁsahā ||

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Pad Path

यः । ते॒ । मदः॑ । वरे॑ण्यः । तेन॑ । प॒व॒स्व॒ । अन्ध॑सा । दे॒व॒ऽअ॒वीः । अ॒घ॒शं॒स॒ऽहा ॥ ९.६१.१९

Rigveda » Mandal:9» Sukta:61» Mantra:19 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:21» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:19


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे स्वामिन् ! आप (देवावीः अघशंसहा) सदाचारियों के रक्षक तथा दुष्टों को मारनेवाले हैं (यः) जो (ते) तुम्हारा (वरेण्यः रस) भजनीय सुख है, (तेन अन्धसा) उस तृप्तिकारक सुख से हम लोगों को (पवस्व) पवित्र करिये ॥१९॥
Connotation: - इस मन्त्र में परमात्मा से आनन्दोपलब्धि की प्रार्थना की गई है ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

देवावी: अघशंसहा

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (यः ते) = जो तेरा रस (मदः) = उल्लास का जनक है, (वरेण्यः) = वरने के योग्य है, (तेन) = उस (अन्धसा) = आध्यायनीय, अत्यन्त ध्यान देने योग्य रस से तू हमें (पवस्व) = प्राप्त हो । [२] यह तेरा रस (देवावी:) = देववृत्तिवाले पुरुषों से जाने योग्य होता है [वी गतौ] तथा (अघशंसहा) =[अघशंसै: हन्यते] बुराई का शंसन करनेवालों से नष्ट किया जाता है । देववृत्ति के पुरुष इस सोम के रस का रक्षण करते हैं। अघशंसों में, राक्षसी वृत्तिवालों में इसके रक्षण का भाव नहीं होता, वे इसे भोग-विलास में विनष्ट कर बैठते हैं ।
Connotation: - भावार्थ- सोम का रस उल्लास का जनक व वरणीय है। देव इसका रक्षण करते हैं। दैत्य, विनाश ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे स्वामिन् ! त्वं (देवावीः अघशंसहा) सदाचारिणां रक्षकोऽसि तथा दुष्टानां घातकोऽसि (यः) यत् (ते) तव (वरेण्यः रसः) भजनीयं सुखमस्ति (तेन अन्धसा) तेन तृप्तिकारकेण सुखेनास्मान् (पवस्व) पवित्रय ॥१९॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The soma ecstasy that’s yours, that is the highest love of our choice. Flow on, radiate, and sanctify us beyond satiation with light divine for the soul, protector and saviour as you are of the holy and destroyer of sin and evil for the good.