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पव॑मान॒ रस॒स्तव॒ दक्षो॒ वि रा॑जति द्यु॒मान् । ज्योति॒र्विश्वं॒ स्व॑र्दृ॒शे ॥

English Transliteration

pavamāna rasas tava dakṣo vi rājati dyumān | jyotir viśvaṁ svar dṛśe ||

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Pad Path

पव॑मान । रसः॑ । तव॑ । दक्षः॑ । वि । रा॒ज॒ति॒ । द्यु॒ऽमान् । ज्योतिः॑ । विश्व॑म् । स्वः॑ । दृ॒शे ॥ ९.६१.१८

Rigveda » Mandal:9» Sukta:61» Mantra:18 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:21» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:18


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमान) हे प्रजारक्षक ! (तव) तुम्हारा (रसः) रक्षाजनित सुख (द्युमान्) सुन्दर (दक्षः) अनायास लभ्य (विराजति) विराजित है और (स्वः) सब (दृशे) पदार्थों के देखने के लिये आप (विश्वम् ज्योतिः) सर्वव्यापिनी सूक्ष्मशक्तियों को पैदा करते हैं ॥१८॥
Connotation: - परमात्मा की कृपा से मनुष्य में दिव्य शक्तियें उत्पन्न होती हैं, जिससे मनुष्य देवभाव को धारण करता है ॥१८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दक्षः-घुमान्

Word-Meaning: - [१] हे (पवमान) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाले सोम ! (तव रसः) = तेरा सारा (दक्षः) = हमारी शक्तियों के विकास का कारण हो [growth] । यह (द्युमान्) = ज्योतिर्मय होता हुआ विराजति विशेषरूप से दीप्त होता है । [२] यह सोम उस (विश्वं ज्योतिः) = व्यापक ज्ञान के प्रकाश को करता है, जो कि अन्ततः (स्वर्दृशे) = हमें उस स्वयं देदीप्यमान ज्योति प्रभु के दर्शन के लिये समर्थ बनाता है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम शक्तियों के विकास व ज्ञान ज्योति का साधन बनता है । अन्ततः हमें प्रभु दर्शन के योग्य बनाता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पवमान) हे जनरक्षक ! (तव) भवतः (रसः) रक्षाजनितसुखं (द्युमान्) सुन्दरम् (दक्षः) अप्रयासलभ्यं (विराजति) विराजितमस्ति। अथ च (स्वः) सर्वान् (दृशे) पदार्थान् द्रष्टुम् त्वं (विश्वम् ज्योतिः) समस्तजगद्व्यापिनीः सूक्ष्मशक्तीः उत्पादयसि ॥१८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O vibrant bliss of the world, the purity, pleasure and ecstasy of yours, versatile and refulgent, radiates over space and time as universal light of divinity for humanity to have a vision of the heaven of bliss.