Viewed 393 times
पव॑मानो अजीजनद्दि॒वश्चि॒त्रं न त॑न्य॒तुम् । ज्योति॑र्वैश्वान॒रं बृ॒हत् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
pavamāno ajījanad divaś citraṁ na tanyatum | jyotir vaiśvānaram bṛhat ||
Pad Path
पव॑मानः । अ॒जी॒ज॒न॒त् । दि॒वः । चि॒त्रम् । न । त॒न्य॒तुम् । ज्योतिः॑ । वै॒श्वा॒न॒रम् । बृ॒हत् ॥ ९.६१.१६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:61» Mantra:16
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:21» Mantra:1
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:16
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमानः) सबको पवित्र करनेवाला कर्मयोगी (दिवः तन्यतुम् न) द्युलोक की शस्त्ररूप विद्युत् के समान (बृहत् वैश्वानरम् ज्योतिः) बड़े विद्युदादि तैजस पदार्थों को (अजीजनत्) पैदा करता है ॥१६॥
Connotation: - कर्मयोगी द्वारा ही विद्युदादि पदार्थ उपयोग में आ सकते हैं, इसलिये हे मनुष्यों ! तुमको चाहिये कि तुम कर्मयोगियों को उत्पन्न करके अपने देश को अभ्युदयशाली बनाओ ॥१६॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
तन्यतु [Thunderbolt]
Word-Meaning: - [१] (पवमानः) = यह हमारे जीवन को पवित्र करनेवाला सोम (ज्योतिः) = उस ज्ञान-ज्योति को (अजीजनत्) = उत्पन्न करता है, जो ज्ञान-ज्योति (वैश्वानरम्) = सब मनुष्यों का हित करनेवाली है और (बृहत्) = वृद्धि की कारणभूत है। [२] सोमरक्षण से वह ज्ञान प्राप्त होता है, जो (दिवः) = द्युलोक से उत्पन्न होनेवाली (चित्रं तन्यतुं न) = अद्भुत अशनि [Thunderbolt] के समान है। यह अशनि अपने अन्दर प्रकाश व गर्जना को लिये हुए है। इसी प्रकार सोमरक्षण से प्राप्त होनेवाला ज्ञान 'प्रकाश को तथा प्रभु-प्रेरणा के रूप में गर्जना को' अपने अन्दर लिये हुए है
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से ज्ञानाग्नि दीप्त होती है, और हृदय की पवित्रता के कारण अन्तःस्थित प्रभु की प्रेरणा सुनाई पड़ती है।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमानः) सर्वपवित्रकर्ता कर्मयोगी (दिवः तन्यतुम् न) द्युलोकस्य शस्त्ररूपविद्युदिव (बृहत् वैश्वानरम् ज्योतिः) विद्युदादितैजसमहापदार्थान् (अजीजनत्) उत्पादयति ॥१६॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Let Soma, progressive, active and zealous power dedicated to humanity and divinity, create the light and culture of universal expansive order from the light of heaven, sublime, awful and beautiful as the light and resounding roar of thunder and lightning.
