Viewed 388 times
तमिद्व॑र्धन्तु नो॒ गिरो॑ व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव । य इन्द्र॑स्य हृदं॒सनि॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
tam id vardhantu no giro vatsaṁ saṁśiśvarīr iva | ya indrasya hṛdaṁsaniḥ ||
Pad Path
तम् । इत् । व॒र्ध॒न्तु॒ । नः॒ । गिरः॑ । व॒त्सम् । सं॒शिश्व॑रीःऽइव । यः । इन्द्र॑स्य । हृ॒द॒म्ऽसनिः॑ ॥ ९.६१.१४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:61» Mantra:14
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:20» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:14
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यः) जो राष्ट्र (इन्द्रस्य हृदंसनिः) अपने स्वामी का भक्त है (तम्) उसको (इत्) निश्चय (नः गिरः) उपदेशप्रयुक्त मेरी वाणियें (वर्धन्तु) बढ़ायें (वत्सम् संशिश्वरीः इव) जिस प्रकार दुग्ध से परिपूर्ण गौ अपने बच्चे को बढ़ाती है, उसी प्रकार ॥१४॥
Connotation: - इस मन्त्र में स्वामिभक्ति का उपदेश किया गया है ॥१४॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
'इन्द्रस्य हृदंसनिः'
Word-Meaning: - [१] (नः गिरः) = हमारे स्तुति-वाणियाँ (इत्) = निश्चय से (तं वर्धन्तु) = उस सोम का वर्धन करने- वाली हों। उसी प्रकार (इव) = जैसे कि (संशिश्वरी:) = उत्तम दुधार गौवें (वत्सम्) = बछड़े को बढ़ाती हैं। हम सोम का स्तवन करते हुए शरीर में सोम का वर्धन करें। [२] उस सोम का वर्धन करें, (यः) = जो कि (इन्द्रस्य) = जितेन्द्रिय पुरुष के (हृदंसनिः) = हृदय का सेवन करनेवाला है । एक जितेन्द्रिय पुरुष को यह सोम प्रिय होता है ।
Connotation: - भावार्थ- हम सोम का स्तवन करें। सोम हमें प्रिय हो, जिससे हम इसका रक्षण करने की प्रबल कामनावाले हों ।
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (यः) यो हि राष्ट्रजनः (इन्द्रस्य हृदंसनिः) स्वकीयप्रभोर्भक्तोऽस्ति (तम्) तं (इत्) निश्चयेन (नः गिरः) उपदेशप्रयुक्ता मदीया वाण्यः (वर्धन्तु) वर्धयन्तु। (वत्सम् संशिश्वरीः इव) यथा दुग्धपरिपूर्णा गौः स्ववत्सं वर्धयति तथैव ॥१४॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - As mother cows love, cheer and caress the calf, so let our songs of adoration celebrate and exalt Soma, love and grace of the heart of Indra, life’s glory on top of existence.
