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अ॒या वी॒ती परि॑ स्रव॒ यस्त॑ इन्दो॒ मदे॒ष्वा । अ॒वाह॑न्नव॒तीर्नव॑ ॥

English Transliteration

ayā vītī pari srava yas ta indo madeṣv ā | avāhan navatīr nava ||

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Pad Path

अ॒या । वी॒ती । परि॑ । स्र॒व॒ । यः । ते॒ । इ॒न्दो॒ इति॑ । मदे॑षु । आ । अ॒व॒ऽअह॑न् । न॒व॒तीः । नव॑ ॥ ९.६१.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:61» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:18» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब ईश्वर क्षात्रधर्म का उपदेश करते हैं।

Word-Meaning: - (इन्दो) हे सेनापते ! (यः) जो शत्रु (ते) तुम्हारे (मदेषु) सर्वसुखकारक प्रजापालन में (आ) विघ्न करे, उसको (अया वीती परिस्रव) अपनी क्रियाओं से अभिभूत करो और (अवाहन् नवतीः नव) निन्यानवे प्रकार के दुर्गों का भी ध्वंसन करो ॥१॥
Connotation: - इस मन्त्र में क्षात्रधर्म्म का वर्णन है और परमात्मा से इस विषय का बल माँगा गया है कि हम सब प्रकार से शत्रुओं का नाश करके संसार में न्याय का प्रचार करें ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

निन्यानवे असुर- पुरियों का विध्वंस

Word-Meaning: - [१] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! तू (अया वीती) = [वी प्रजनने] इन शक्तियों के विकास के साथ परिस्त्रव शरीर में चारों ओर (परिस्त्रव) = परिस्रुत हो, गतिवाला हो कि (ते मदेषु) = तेरे से उत्पन्न उल्लासों में निवास करनेवाला (यः) = जो यह इन्द्र है वह (नव नवती:) = निन्यानवे असुरों की पुरियों को (आ अवाहन्) = समन्तात् सुदूर विनष्ट करनेवाला हो। [२] हमारे जीवनों में शतशः आसुरभाव जागते रहते हैं। कई बार हम इनके ही अधिष्ठान बन जाते हैं। जिस समय हम सोम की महिमा को समझ लेते हैं, उस समय हम सोमरक्षण करते हुए, इन आसुरभावों को विनष्ट करनेवाले बनते हैं ।
Connotation: - भावार्थ - हम शरीर में सोम को रक्षित करें और सब आसुरभावों को मार भगायें।
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ARYAMUNI

अथेश्वरेण क्षात्रधर्म उपदिश्यते।

Word-Meaning: - (इन्दो) हे सेनाधीश ! (यः) यो वैरी (ते) तव (मदेषु) सर्वसुखकारकप्रजारक्षणेषु (आ) विघ्नं करोतु तं (अया वीती परिस्रव) स्वकीयाभिः क्रियाभिरभिभूतं कुरु। अथ च (अवाहन् नवतीः नव) नवनवतिविधदुर्गाणां विध्वंसनं कुरु ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, joyous ruler and protector of life, let this creative peace, presence, power and policy of yours prevail and advance, promoting those who join the happy advance, and repelling, dispelling, even destroying ninety-and-nine strongholds of darkness which obstruct the progress.