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अनु॑ द्र॒प्सास॒ इन्द॑व॒ आपो॒ न प्र॒वता॑सरन् । पु॒ना॒ना इन्द्र॑माशत ॥

English Transliteration

anu drapsāsa indava āpo na pravatāsaran | punānā indram āśata ||

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Pad Path

अनु॑ । द्र॒प्सासः॑ । इन्द॑वः । आपः॑ । न । प्र॒वता॑ । अ॒स॒र॒न् । पु॒ना॒नाः । इन्द्र॑म् । आ॒श॒त॒ ॥ ९.६.४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:6» Mantra:4 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:26» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:4


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (द्रप्सासः) गतिशील परमात्मा (इन्दवः) ऐश्वर्यसम्पन्न (अनु) सर्वत्र व्याप्त हो रहा है (प्रवता, आपः., न) बहते हुए जलों के समान (असरन्) गति करता है। उक्त परमात्मा (पुनानाः) पवित्र करता हुआ (इन्द्रम्) ऐश्वर्य्य को (आशत्) देता है।
Connotation: - जिस प्रकार सर्वत्र बहते हुए जल इस पृथिवी को नाना प्रकार के लता गुल्मादिकों से सुशोभित करते हैं, इसी प्रकार परमात्मा अपनी व्यापकता से प्रत्येक प्राणी में आह्लाद उत्पन्न करता है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सोमरक्षण से पवित्रता

Word-Meaning: - [१] (द्रप्सास:) = [Drop ] कणों के रूप में होनेवाले (इन्दवः) = ये सोम [ वीर्यकण] (आप: न) = व्याप्त होनेवाले जलों के समान (प्रवता अनु असरन्) = [ प्रवत् Height, elevation] शरीर में उच्चता के अनुसार गतिवाले होते हैं। शरीर में, प्राणसाधना के द्वारा, जब इनकी ऊर्ध्वगति होती है तो ये सारे शरीर में व्याप्त हो जाते हैं । [२] (इन्द्रम्) = जितेन्द्रिय पुरुष को (पुनाना:) = पवित्र करते हुए (आशत) = ये व्याप्त करनेवाले होते हैं । जितेन्द्रियता इन सोमकणों के रक्षण का साधन बनती है । रक्षित सोमकण इस जितेन्द्रिय पुरुष को आधिव्याधियों से शून्य व पवित्र बनाते हैं।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (द्रप्सासः) गमनशील ईश्वरः (इन्दवः) ऐश्वर्यसम्पन्नः (अनु) सर्वत्र अश्नुते (प्रवता, आपः, न) स्यन्दमानं जलमिव (असरन्) सरति स एव (पुनानाः) लोकं शोधयन् (इन्द्रम्) ऐश्वर्यं (आशत्) ददाति ॥४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The streams of that inspiring power and passion flow on without interruption like showers of rain and, inspiring, sanctifying and beatifying, bring us honour, excellence and fame for the soul.