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पव॑स्वा॒द्भ्यो अदा॑भ्य॒: पव॒स्वौष॑धीभ्यः । पव॑स्व धि॒षणा॑भ्यः ॥

English Transliteration

pavasvādbhyo adābhyaḥ pavasvauṣadhībhyaḥ | pavasva dhiṣaṇābhyaḥ ||

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Pad Path

पव॑स्व । अ॒त्ऽभ्यः । अदा॑भ्यः । पव॑स्व । ओष॑धीभ्यः । पव॑स्व । धि॒षणा॑भ्यः ॥ ९.५९.२

Rigveda » Mandal:9» Sukta:59» Mantra:2 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:16» Mantra:2 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:2


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! आप (अदाभ्यः) अदम्भनीय हैं (अद्भ्यः) जलों से (औषधिभ्यः) औषधियों से (धिषणाभ्यः) तथा बुद्धियों से (पवस्व) हमको सुरक्षित कीजिये ॥२॥
Connotation: - तात्पर्य यह है कि परमात्मा सब शक्तियों के ऊपर विराजमान है। उसका शासन करनेवाली कोई अन्य शक्ति नहीं ॥२॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धिषणा की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू (अदाभ्यः) = हिंसित होनेवाला नहीं । (अद्भ्यः) = जलों से तू हमें पवस्व प्राप्त हो। इसी प्रकार (ओषधीभ्यः पवस्व) = ओषधियों से तू हमें प्राप्त हो। शरीर में सोम के रक्षण के लिये आवश्यक है कि हम ओषधियों व जलों का ही प्रयोग करें। ये ही 'सोम्य' है, सोमरक्षण के लिये अनुकूल है। मांस आदि मानव के भोजन नहीं हैं। ये हमें राक्षसी वृत्ति का बनाते हैं। शरीर में सुरक्षित सोम रोगकृमियों को विनष्ट करके हमें नीरोग बनाता है। [२] हे सोम ! तू (धिषणाभ्यः) = प्रशस्त बुद्धियों के लिये (पवस्व) = हमें प्राप्त हो । सुरक्षित सोम बुद्धि को सूक्ष्म बनाता है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण के लिये हम जल व ओषधियों का ही प्रयोग करें। मांस भोजन से बचें। सुरक्षित सोम हमारी बुद्धि को सूक्ष्म बनायेगा ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! त्वम् (अदाभ्यः) अदम्भनीयोऽसि (अद्भ्यः) जलैः (ओषधिभ्यः) औषधैः (धिषणाभ्यः) तथा बुद्धिभिः (पवस्व) मां सुरक्षय ॥२॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O vitality of Soma, divine energy, flow on and energise us with fluent systemic energy of body and mind, redoubtable and undaunted power, flow in and on with herbs and sanatives, energise, purify and sanctify with self-controlled will and invincible will divine.