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पव॑स्व गो॒जिद॑श्व॒जिद्वि॑श्व॒जित्सो॑म रण्य॒जित् । प्र॒जाव॒द्रत्न॒मा भ॑र ॥

English Transliteration

pavasva gojid aśvajid viśvajit soma raṇyajit | prajāvad ratnam ā bhara ||

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Pad Path

पव॑स्व । गो॒ऽजित् । अ॒श्व॒ऽजित् । वि॒श्व॒ऽजित् । सो॒म॒ । र॒ण्य॒ऽजित् । प्र॒जाऽव॑त् । रत्न॑म् । आ । भ॒र॒ ॥ ९.५९.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:59» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:16» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


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ARYAMUNI

अभ्युन्नति को चाहनेवाला केवल परमात्मा की ही प्रार्थना करे, यह कहते हैं।

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (गोजित् अश्वजित्) आप गवाश्वादि ऐश्वर्यों से विराजमान तथा (रण्यजित्) संग्राम में दुराचारियों को पराजय प्राप्त करानेवाले और (विश्वजित्) संसार में सर्वोपरि हैं। आप हमको (पवस्व) पवित्र करिये और (प्रजावद्रत्नम्) सन्तानादियुक्त रत्नों से परिपूर्ण करिये ॥१॥
Connotation: - परमात्मा की दया से ही पुरुष को विविध प्रकार के रत्नों का लाभ होता है ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

गोजित्- अश्वजित्

Word-Meaning: - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (गोजित्) = हमारे लिये ज्ञानेन्द्रियों का विजय करनेवाला होकर पवस्व प्राप्त हो, तेरे रक्षण से हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ उत्तम बनें । इसी प्रकार तू हमारे लिये (अश्वजित्) = उत्तम कर्मेन्द्रियों को जीतनेवाला हो। (विश्वजित्) = तू हमारे लिये सब आवश्यक वसुओं का विजेता है । (रण्यजित्) = सब रमणीय पदार्थों को प्राप्त करानेवाला है । [२] तू (प्रजावत्) = उत्कृष्ट विकासवाले (रत्नम्) = रमणीय तत्त्व को (आभर) = हमारे में सर्वथा भरनेवाला हो । अथवा तू (प्रजावत्) = उत्कृष्ट सन्तान को प्राप्त करानेवाले (रत्नम्) = मणि तुल्य वीर्य को (आभर) = प्राप्त करा ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से उत्कृष्ट कर्मेन्द्रियाँ - ज्ञानेन्द्रियाँ सब वसु वरणीय तत्त्व प्राप्त होते हैं । यही उत्कृष्ट सन्तान के प्राप्त करानेवाले वीर्य को देता है।
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ARYAMUNI

अथ स्वाभ्युन्नतिं वाञ्छद्भिरवन्ध्यशासनः परमात्मैव प्रार्थनीय इत्युच्यते।

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (गोजित् अश्वजित्) भवान् गवाश्वाद्यैश्वर्यैर्युक्तस्तथा (रण्यजित्) रणे दुष्टेभ्यः पराजयप्रदाता अथ च (विश्वजित्) संसारे सर्वोपर्यस्ति भवान् अतो मां (पवस्व) पवित्रयतु। तथा (प्रजावद्रत्नमाभर) सन्तानादियुक्तरत्नैः परिपूर्णं करोतु ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Victorious over senses and mind, victorious over will and ambition, victorious over the world, victorious over pleasure, pride and victory, O Soma, life of life, flow on and bring us jewels of children, family life and noble generations.