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स नो॒ विश्वा॑ दि॒वो वसू॒तो पृ॑थि॒व्या अधि॑ । पु॒ना॒न इ॑न्द॒वा भ॑र ॥

English Transliteration

sa no viśvā divo vasūto pṛthivyā adhi | punāna indav ā bhara ||

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Pad Path

सः । नः॒ । विश्वा॑ । दि॒वः । वसु॑ । उ॒तो इति॑ । पृ॒थि॒व्याः । अधि॑ । पु॒नानः । इ॒न्दो॒ इति॑ । आ । भ॒र॒ ॥ ९.५७.४

Rigveda » Mandal:9» Sukta:57» Mantra:4 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:14» Mantra:4 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:4


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दो) हे परमात्मन् ! (सः) वह आप (नः) हमारे लिये (दिवः विश्वा वसु) द्युलोकसम्बन्धी सकल सम्पत्तियें (उतो) तथा (पृथिव्याः अधि) पृथिवीसम्बन्धी सम्पूर्ण सम्पत्तियें (आभर) आहरण कीजिये और (पुनानः) मुझको पवित्र करिये ॥४॥
Connotation: - सम्पूर्ण सम्पत्तियों का स्वामी एकमात्र परमात्मा ही है, इसलिए ऐश्वर्यप्राप्ति के लिए उसी की शरणागत होना आवश्यक है ॥४॥ यह ५७ वाँ सूक्त और १४ वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

द्युलोक व पृथिवीलोक का ऐश्वर्य

Word-Meaning: - [१] हे (इन्दो) = शक्ति को देनेवाले सोम ! तू (विश्वा) = सब (दिवः अधि) = मस्तिष्क रूप द्युलोक में स्थित (वसु) = वसुओं को (नः) = हमारे लिये (आभर) = प्राप्त करा । मस्तिष्क रूप द्युलोक के (वसु) = ऐश्वर्य 'ज्ञान-विज्ञान' ही हैं। सुरक्षित सोम इन वसुओं को प्राप्त करानेवाला होता है। सोम से ज्ञानाग्नि दीप्त होती है, बुद्धि सूक्ष्म बनती है। यह सूक्ष्म बुद्धि सब ज्ञान-विज्ञान को प्राप्त करनेवाली होती है [२] (उत उ) = और निश्चय से हे सोम ! (पुनानः) = तू हमें पवित्र करता हुआ (पृथिव्याः अधि) = पृथिवी में, इस शरीर रूप पृथिवी में स्थित वसुओं को भी प्राप्त करा । मस्तिष्क में ज्ञान को तू भरनेवाला हो और शरीर में शक्ति को देनेवाला हो ।
Connotation: - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम द्युलोक व पृथिवीलोक के ऐश्वर्यों को प्राप्त कराता है। अवत्सार ही कहता है-
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (इन्दो) हे परमात्मन् ! (सः) स त्वम् (नः) अस्मदर्थं (दिवः विश्वा वसु) द्युलोकसम्बन्धिसकलसम्पदः (उतो) तथा (पृथिव्याः अधि) भूमिसम्बन्धिसमस्तसम्पत्तीः (आभर) आहर। अथ च (पुनानः) मां पवित्रं कुरु ॥४॥ इति सप्तपञ्चाशत्तमं सूक्तं चतुर्दशो वर्गश्च समाप्तः ॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, lord of wealth, beauty and excellence, ever pure and sanctifying, may, we pray, bring us all the wealth, honour and fame of life on earth and the light and magnificence of heaven.