अस्य॑ व्र॒तानि॒ नाधृषे॒ पव॑मानस्य दू॒ढ्या॑ । रु॒ज यस्त्वा॑ पृत॒न्यति॑ ॥
English Transliteration
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asya vratāni nādhṛṣe pavamānasya dūḍhyā | ruja yas tvā pṛtanyati ||
Pad Path
अस्य॑ । व्र॒तानि॑ । न । आ॒ऽधृषे॑ । पव॑मानस्य । दुः॒ऽध्या॑ । रु॒ज । यः । त्वा॒ । पृ॒त॒न्यति॑ ॥ ९.५३.३
Rigveda » Mandal:9» Sukta:53» Mantra:3
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:10» Mantra:3
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:3
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमानस्य अस्य) जगत्पावक आपके नियमानुशासन को (दूढ्या) कोई भी दुराचारी (नाधृषे) बाधित नहीं कर सकता, क्योंकि (यः त्वा पृतन्यति) जो आपसे इर्ष्या करता है, उसको (रुज) आप शक्तिहीन कर देते हैं ॥३॥
Connotation: - परमात्मा दुराचारियों का अधःपतन करते हैं और सदाचारियों को सदैव उन्नतिशील बनाते हैं ॥३॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
सोमरक्षण के नियमों का पालन
Word-Meaning: - [१] (अस्य पवमानस्य) = इस जीवन को पवित्र करनेवाले सोम के (व्रतानि) = रक्षण के साधनभूत कर्म-नियम 'नियमः पुण्यकं व्रतम्', (दूढ्या) = [दुर्धिया] दुर्बुद्धि के कारण मेरे से (न आधृषे) = धर्षण के लिये नहीं होते। अर्थात् मैं दुष्ट बुद्धि के कारण सोम के रक्षण के साधनभूत नियमों को नहीं तोड़ता । [२] जब सोमरक्षण के नियमों का पालन करता हुआ मैं सोम का रक्षण करता हूँ तो हे सोम ! (यः) = जो भी (त्वा पृतन्यति) = तेरे पर आक्रमण करता है, उसे तू (रुज) = नष्ट कर । रक्षित सोम हमारे सब शत्रुओं को नष्ट करके हमारा रक्षण करता है ।
Connotation: - भावार्थ - हम सोमरक्षण के नियमों का पालन करते हुए सोम का रक्षण करें। यह हमारे सब शत्रुभूत रोगकृमियों व वासनाओं का विनाश करके हमारा रक्षण करेगा।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (पवमानस्य अस्य) जगत्पवित्रयितुरनुशासनं (दूढ्या) कश्चिदपि दुश्चरित्रः (नाधृषे) बाधितुं न शक्नोति | यतः (यः त्वा पृतन्यति) यो भवत ईर्ष्यति तम् (रुज) अशक्ततां नयसि ॥३॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - The rules and laws of this mighty creative and dynamic power no one can resist with his adverse force. O Soma, whoever opposes you, break open and destroy.
