स प॑वस्व मदिन्तम॒ गोभि॑रञ्जा॒नो अ॒क्तुभि॑: । इन्द॒विन्द्रा॑य पी॒तये॑ ॥
English Transliteration
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sa pavasva madintama gobhir añjāno aktubhiḥ | indav indrāya pītaye ||
Pad Path
सः । प॒व॒स्व॒ । म॒दि॒न्ऽत॒म॒ । गोभिः॑ । अ॒ञ्जा॒नः । अ॒क्तुऽभिः॑ । इन्दो॒ इति॑ । इन्द्रा॑य । पी॒तये॑ ॥ ९.५०.५
Rigveda » Mandal:9» Sukta:50» Mantra:5
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:7» Mantra:5
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:5
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे परमात्मन् ! (मदिन्तम) सर्वोपरि आनन्द के जनयिता ! (अक्तुभिः गोभिः अञ्जानः) साधनभूत इन्द्रियों द्वारा ध्यानविषय किये गये (सः) सकलभुवनप्रसिद्ध वह आप (इन्द्राय पीतये) जीवात्मा की परम तृप्ति के लिये (पवस्व) ब्रह्मानन्द का क्षरण कीजिये ॥५॥
Connotation: - जीव की सच्ची तृप्ति परमात्मानन्द से ही होती है, अन्यथा नहीं ॥५॥ यह ५० वाँ सूक्त और ७ वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
प्रकाश - रश्मियों व प्रभु की प्राप्ति
Word-Meaning: - [१] हे (मदिन्तम) = अत्यन्त हर्ष को देनेवाले सोम! (सः) = वह तू (पवस्व) = हमें प्राप्त हो । (गोभि:) = ज्ञान की वाणियों से (अञ्जान:) = अलंकृत होता हुआ तू हमें पवित्र कर। (अक्तुभिः) = प्रकाश की रश्मियों के हेतु से तू हमें प्राप्त हो। जितना जितना हम ज्ञान की वाणियों का अध्ययन करेंगे उतना उतना हम सोम रक्षण के योग्य बनेंगे। रक्षित सोम हमारे जीवन में प्रकाश की रश्मियों को प्राप्त करायेगा। [२] हे (इन्दो) = हमें शक्तिशाली बनानेवाले सोम ! तू रक्षित होकर (इन्द्राय) = हमें प्रभु को प्राप्त कराने के लिये हो, प्रभु प्राप्ति का साधन बन । (पीतये) = तू हमारे रक्षण के लिये हो, हमें रोगों से बचानेवाला हो ।
Connotation: - भावार्थ- स्वाध्याय के द्वारा हम सोम का रक्षण करते हैं। रक्षित सोम हमें प्रकाश की रश्मियों को प्राप्त कराके प्रभु को प्राप्त कराता है। उच्चथ्य ही कहते हैं-
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (इन्दो) हे जगदीश्वर ! (मदिन्तम) उत्कृष्टानन्दजनक ! (अक्तुभिः गोभिः अञ्जानः) साधनभूतेन्द्रियैर्ध्यानविषयीभूतः (सः) सकलभुवनप्रसिद्धस्त्वं (इन्द्राय पीतये) जीवात्मनः परमतृप्तये (पवस्व) ब्रह्मानन्दक्षरणं कुरु ॥५॥ इति पञ्चाशत्तमं सूक्तं सप्तमो वर्गश्च समाप्तः ॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Flow on, most exhilarating Spirit, adored and exalted by concentrative mind and senses of the seeker in meditation, flow on for ecstatic experience of the soul.
