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उत्ते॒ शुष्मा॑स ईरते॒ सिन्धो॑रू॒र्मेरि॑व स्व॒नः । वा॒णस्य॑ चोदया प॒विम् ॥

English Transliteration

ut te śuṣmāsa īrate sindhor ūrmer iva svanaḥ | vāṇasya codayā pavim ||

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Pad Path

उत् । ते॒ । शुष्मा॑सः । ई॒र॒ते॒ । सिन्धोः॑ । ऊ॒र्मेःऽइ॑व । स्व॒नः । वा॒णस्य॑ । चो॒द॒य॒ । प॒विम् ॥ ९.५०.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:50» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:7» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब परमात्मा की शक्तियों की निरन्तरता का वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! (सिन्धोः ऊर्मेः स्वनः इव) जिस प्रकार समुद्र की तरङ्गों के शब्द अनवरत होते रहते हैं, उसी प्रकार (ते शुष्मासः ईरते) आपकी शक्तियों के वेग निरन्तर व्याप्त होते रहते हैं। आप (वाणस्य पविं चोदय) वाणी की शक्ति को प्रेरित करें ॥१॥
Connotation: - परमात्मा की शक्तियें अनन्त हैं और नित्य हैं। यद्यपि प्रकृति और जीवात्मा की शक्तियें अनादि अनन्त होने से नित्य हैं, तथापि वे अल्पाश्रित होने से अल्प और परिणामी नित्य हैं, कूटस्थ नित्य नहीं ॥ तात्पर्य यह है कि जीव और प्रकृति के भाव उत्पत्तिविनाशशाली हैं और ईश्वर के भाव सदा एकरस हैं ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शरीर में बल, मस्तिष्क में ज्ञान, हृदय में प्रभु-प्रेरणा

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (ते) = तेरे (शुष्मासः) = शत्रु-शोषक बल (उद् ईरते) = उद्गत होते हैं। शरीर में सोम के सुरक्षित होने पर वह (वर्चस्) = [vitality] उत्पन्न होता है जो कि सब रोगकृमियों का शोषण कर देता है। यह शुष्म उसी प्रकार उत्पन्न होता है (इव) = जैसे कि (सिन्धोः ऊर्मेः स्वनः) = ज्ञान-समुद्र की तरंगों का शब्द उत्पन्न होता है । सोमरक्षण से ज्ञानाग्नि भी दीप्त हो उठती है। ज्ञानजल का प्रवाह नियम से हमारे में प्रवाहित होने लगता है । [२] हे सोम ! तू (वरणस्य) = वाचस्पति प्रभु की (पविम्) = वाणी को (चोदया) = हमारे में प्रेरित कर । सोमरक्षण से हृदय इस प्रकार पवित्र हो जाता है कि उसमें प्रभु की वाणी सुन पड़ने लगती है ।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से [क] शरीर में शत्रु-शोषक बल प्राप्त होता है, [ख] मस्तिष्क में ज्ञान - समुद्र की तरंगें उठने लगती हैं, [ग] हृदय में प्रभु की वाणी सुनाई पड़ती है ।
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ARYAMUNI

अथ परमात्मनः शक्तेर्नैरन्तर्यं वर्ण्यते।

Word-Meaning: - हे दीनपरिपालक ! (सिन्धोः ऊर्मेः स्वनः इव) यथा समुद्रस्य वीचीनामनवरताः शब्दा भवन्ति तथैव (ते शुष्मासः ईरते) भवच्छक्तिवेगा निरन्तरं व्याप्ता भवन्ति। भवान् (वाणस्य पविं चोदय) वाण्याः शक्तिं प्रेरयतु। “वाण इति वाङ्नामसु पठितं निघण्टौ” ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Higher and higher rise and roll your powers, purities and forces, roaring like waves of the sea. Keep up the motion of the wheel of life, let the swell of music rise on with the chant going on.