तया॑ पवस्व॒ धार॑या॒ यया॒ गाव॑ इ॒हागम॑न् । जन्या॑स॒ उप॑ नो गृ॒हम् ॥
English Transliteration
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tayā pavasva dhārayā yayā gāva ihāgaman | janyāsa upa no gṛham ||
Pad Path
तया॑ । प॒व॒स्व॒ । धार॑या । यया॑ । गावः॑ । इ॒ह । आ॒ऽगम॑न् । जन्या॑सः । उप॑ । नः॒ । गृ॒हम् ॥ ९.४९.२
Rigveda » Mandal:9» Sukta:49» Mantra:2
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:6» Mantra:2
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:2
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (तया धारया पवस्व) हे परमात्मन् ! आप मुझे उस आनन्द की धारा से पवित्र करिये (यया) जिस धारा से (गावः) सम्पूर्ण इन्द्रियें (जन्यासः) सब जनों का हितकारक होकर (इह नः गृहम्) अपने गृहरूप शरीर के अभ्यन्तर ही में (उपागमन्) आयें ॥२॥
Connotation: - हे परमात्मन् ! आप हमारी इन्द्रियों को अन्तर्मुखी बनाकर हमको संयमी बनाइये ॥२॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
जन्यासः गावः
Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू (तया धारया) = अपनी उस धारणशक्ति के साथ (पवस्व) = हमें प्राप्त हो, (यया) = जिस से (गाव:) = वेदवाणियाँ (हि) = यहाँ इस जीवन में आगमन् हमें प्राप्त हों । [२] (जन्यास:) = [जननं जनः, तत्र उत्तमाः] सद्गुणों के विकास में उत्तम ये वेदवाणियाँ (नः) = हमारे (गृहम्) = इस शरीररूप घर में (उप) = समीपता से प्राप्त हों। सोमरक्षण से बुद्धि तीव्र होती है और हम ज्ञान की वाणियों को अपनाने के लिये तैयार होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- सोमरक्षण से हमें वे वेदवाणियाँ प्राप्त होती हैं जो कि हमारे जीवनों में सद्गुणों को जन्म देनेवाली होती हैं।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (तया धारया पवस्व) हे जगदीश्वर ! त्वं तया आनन्दधारया पवित्रय (यया) यया धारया (गावः) दशेन्द्रियाणि (जन्यासः) सर्वजनहितत्वमुत्पाद्य (इह नः गृहम्) स्वसदनरूप- शरीराभ्यन्तरे एव (उपागमन्) आयान्तु ॥२॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Shower and purify us with that stream of power and purity of peace and plenty by which our senses, mind and intelligence, socially and positively motivated, may be balanced in our personality and we may feel at home with ourselves.
