'शतं पुरो रुक्षणिम्' [clearing, of the slum]
Word-Meaning: - [१] हम उस सोम को [ईमहे =] चाहते हैं जो कि (संवृक्तधृष्णुम्) = [संवृक्त-संछिन्न] नष्ट किये हैं, धर्षणशील शत्रु जिसने ऐसा है। यह सोम 'काम-क्रोध-लोभ' को नष्ट करता है, ये शत्रु हमारा धर्षण करते हैं । सुरक्षित सोम इन धर्षक शत्रुओं को छिन्न कर डालता है। (उक्थ्यम्) = यह सोम स्तुत्य है अथवा हमें स्तुति में प्रेरित करनेवाला है। सोम के रक्षित होने पर हम प्रभु-स्तवन की ओर प्रवृत्त होते हैं। यह सोम (महामहिव्रतम्) = महान् बहुत कर्मोंवाला है । सोम का रक्षण करनेवाला पुरुष महनीय कर्मों में प्रवृत्त रहता है। यह सोम (मदम्) = हमारे लिये उल्लास को देनेवाला है । [२] यह सोम शरीर में बने हुए असुरों के (शतम्) = सैकड़ों (पुरः) = नगरों को (रुरुक्षणिम्) = [विनाशयन्तम्] नष्ट करनेवाला है। 'काम' इन्द्रियों में, 'क्रोध' मन में व 'लोभ' बुद्धि में अपना नगर बनाता है। इन सब नगरों को यह सोम विध्वस्त करता है। यह सोम हमारे शरीर को असुर- पुरियों की स्थापना से मलिन नहीं होने देता। इन आसुरभावों से [slum] में परिवर्तित हुए हुए शरीर को इन के विनाश से फिर से यह सोम सुन्दर बना देता है ।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम शत्रुओं का धर्षण करनेवाला है, हमें स्तुति में प्रवृत्त करता है, महनीय कर्मों के प्रति झुकाववाला बनाता है, उल्लासमय करता है। यह असुरों की नगरियों का विध्वंस करता है।