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आत्सोम॑ इन्द्रि॒यो रसो॒ वज्र॑: सहस्र॒सा भु॑वत् । उ॒क्थं यद॑स्य॒ जाय॑ते ॥

English Transliteration

āt soma indriyo raso vajraḥ sahasrasā bhuvat | ukthaṁ yad asya jāyate ||

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Pad Path

आत् । सोमः॑ । इ॒न्द्रि॒यः । रसः॑ । वज्रः॑ । स॒ह॒स्र॒ऽसाः । भु॒व॒त् । उ॒क्थम् । यत् । अ॒स्य॒ । जाय॑ते ॥ ९.४७.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:47» Mantra:3 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:4» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:3


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यत् अस्य उक्थम् जायते) अब इस परमात्मा की वेदरूपी स्तुति का आविर्भाव होता है (आत्) तब (सोमः) वह परमात्मा (इन्द्रियः रसः) जीवात्मा का तृप्तिकारक आनन्दमय रस तथा (वज्रः) दुष्टों से रक्षा करने के लिये शस्त्ररूप और (सहस्रसाः) अनन्त शक्तियों का प्रदाता (भुवत्) होता है ॥३॥
Connotation: - जीवात्मा के लिये परमात्मा ने अनन्त शक्तियें प्रदान की हैं, परन्तु उन सबका आविर्भाव तभी होता है, जब जीवात्मा वेदों द्वारा उन शक्तियों का ज्ञाता बनता है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सहस्त्रसा

Word-Meaning: - (यत् अस्य) = जब सोम का (उक्थं) = उत्पादन (जायते) = होता है। (आत्) = इसके बाद यह (सोम) = वीर्य शक्ति से (इन्द्रिय) = ज्ञानेन्द्रियाँ व कर्मेन्द्रियाँ (सहस्रसा:) = बहुत प्रकार से (रसः) = बलवती और (वज्रः) = तेजस्विनी (भुवत्) = बन जाती हैं।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमारी उभयेन्द्रियों की शक्तियों का वर्धन करता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यत् अस्य उक्थम् जायते) यदास्य परमात्मनः वेदरूपिणी स्तुतिराविर्भवति (आत्) तदा (सोमः) स परमात्मा (इन्द्रियः रसः) जीवात्मनस्तृप्तिकारकं मोदमयरसं तथा (वज्रः) दुष्टेभ्यो रक्षणाय शस्त्ररूपः तथा (सहस्रसाः) अनन्तशक्तिप्रदाता (भुवत्) भवति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - And when the song of adoration is sung in honour of this Soma, then the spirit of peace and inner strength, inner joy, adamantine courage and rectitude edifying the mind and sense of the celebrant arise a thousandfold in the soul.