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अ॒या सोम॑: सुकृ॒त्यया॑ म॒हश्चि॑द॒भ्य॑वर्धत । म॒न्दा॒न उद्वृ॑षायते ॥

English Transliteration

ayā somaḥ sukṛtyayā mahaś cid abhy avardhata | mandāna ud vṛṣāyate ||

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Pad Path

अ॒या । सोमः॑ । सु॒ऽकृ॒त्यया॑ । म॒हः । चि॒त् । अ॒भि । अ॒व॒र्ध॒त॒ । म॒न्दा॒नः । उत् । वृ॒ष॒ऽय॒ते॒ ॥ ९.४७.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:47» Mantra:1 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:4» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब परमात्मा उद्योग का उपदेश करते हैं।

Word-Meaning: - (सोमः) परमात्मा (अया सुकृत्यया) विद्वानों के शुभकर्म्मों से (मन्दानः) हर्ष को प्राप्त होता हुआ (महश्चित् अभ्यवर्धत) उनको अत्यन्त अभ्युदय को प्राप्त कराता है और (उद् वृषायते) उन विद्वानों के लिये बल प्रदान करता है ॥१॥
Connotation: - हे अभ्युदयाभिलाषी जनों ! यदि आप अभ्युदय को चाहते हैं, तो एकमात्र परमात्मा की शरण को प्राप्त होकर उद्योगी बनें ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

तेजस्विता का वर्धन

Word-Meaning: - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते! तू (अया सुकृत्यया) = इस शोभन क्रियाशीलता के द्वारा (महः चित् अभि) = तेजस्विता की ओर (अवर्धत) = बढ़ता है। यदि हम यज्ञादि उत्तम कर्मों में लगे रहते हैं तो हम वासना के शिकार नहीं होते। इससे सोम सुरक्षित रहता है और तेजस्विता का अभिवर्धन होता है । [२] इस सोम के रक्षण के होने पर (मन्दानः) = मनुष्य प्रसन्नता का अनुभव करता हुआ (उद् वृषायते) = उत्कृष्ट शक्तिशाली पुरुष की तरह आचरण करता है। निर्बल पुरुष 'ईर्ष्या, द्वेष व क्रोध' में चलता है । सबल पुरुष इन भावों को हेय समझता हुआ कभी इनसे प्रेरित नहीं होता । भावार्थ- सोमरक्षण से
Connotation: - तेजस्विता का वर्धन होता है और यह सोमी उत्कृष्ट शक्तिशाली पुरुष की तरह आचरण करता है ।
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ARYAMUNI

अथ परमात्मा उद्योगमुपदिशति।

Word-Meaning: - (सोमः) परमात्मा (अया सुकृत्यया) विदुषां शुभकर्मणा (मन्दानः) प्रहृष्यन् (महश्चित् अभ्यवर्धत) तेभ्यः पण्डितेभ्यः अभ्युदयं प्रापयति। अथ च (उद्वृषायते) तेभ्यो बलं प्रददाति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - This Soma, lordly Spirit of peace and joy, feels great by this yajnic act of homage and, happy and exalted, loves to advance and exalt the celebrants.