स नो॑ अ॒द्य वसु॑त्तये क्रतु॒विद्गा॑तु॒वित्त॑मः । वाजं॑ जेषि॒ श्रवो॑ बृ॒हत् ॥
English Transliteration
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sa no adya vasuttaye kratuvid gātuvittamaḥ | vājaṁ jeṣi śravo bṛhat ||
Pad Path
सः । नः॒ । अ॒द्य । वसु॑त्तये । क्र॒तु॒ऽवित् । गा॒तु॒वित्ऽत॑मः । वाज॑म् । जे॒षि॒ । श्रवः॑ । बृ॒हत् ॥ ९.४४.६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:44» Mantra:6
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:1» Mantra:6
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:6
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (क्रतुवित्) सबके कर्मों को जाननेवाले और (गातुवित्तमः) कवियों में उत्तम कवि (सः) वह आप (वसुत्तये) रत्नादि ऐश्वर्यों की प्राप्ति के लिये (नः) हमारे (बृहत् वाजम् श्रवः) बड़े बल तथा कीर्ति को (अद्य) तत्काल ही (जेषि) बढ़ाइये ॥६॥
Connotation: - कवि शब्द के अर्थ यहाँ सर्वज्ञ के हैं। ज्ञानी-विज्ञानी सब में से एकमात्र परमात्मा ही सर्वोपरि कवि सर्वत्र है, अन्य कोई नहीं ॥६॥ यह ४४ वाँ सूक्त और पहला वर्ग समाप्त हुआ ॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
क्रतुविगातुवित्तमः
Word-Meaning: - [१] हे सोम ! (सः) = वह तू (अद्य) = आज (नः) = हमारे (वसुत्तये) = धन लाभ के लिये (क्रतुवित्) = शक्ति को प्राप्त करानेवाला है तथा (गातुवित्तमः) = उत्कृष्ट मार्ग का ज्ञान देनेवाला है। सोम शक्ति [= क्रतु] को प्राप्त कराता है। यह ज्ञान वृद्धि के द्वारा मार्ग का प्रदर्शन करता है। शक्ति व ज्ञान को प्राप्त करके हम वसुओं [धनों] को प्राप्त करते हैं । [२] हे सोम ! तू हमारे लिये (वाजं जेषि) = शक्ति का विजय करता है। शक्ति के साथ (बृहत् श्रवः) = वृद्धि के कारणभूत महान् ज्ञान को तू हमारे लिये (जेषि) = जीतता है। शक्ति व ज्ञान की विजय हमारे जीवन को पूर्णता की ओर ले चलती है।
Connotation: - भावार्थ-सोम हमें शक्ति व ज्ञान प्राप्त कराके सब वसुओं का विजेता बनाता है। 'अयास्य' ही कहते हैं-
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - (क्रतुवित्) सर्वकर्मज्ञः (गातुवित्तमः) कवीनामुत्तमः कविः (सः) स भवान् (वसुत्तये) रत्नाद्यैश्वर्यप्राप्तये (नः) अस्माकं (बृहत् वाजम् श्रवः) महत् बलं कीर्तिञ्च (अद्य) सपदि (जेषि) वर्द्धयतु ॥६॥ इति चतुश्चत्वारिंशत्तमं सूक्तं प्रथमो वर्गश्च समाप्तः ॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Let us celebrate Soma: He, most poetic visionary of the knowledge of holy, creative and progressive action, comes and blesses us with the achievement and victory of success, progress and continuous growth of abundant food, inexhaustible energy, high excellence, universal fame and rising glory.
