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स नो॒ भगा॑य वा॒यवे॒ विप्र॑वीरः स॒दावृ॑धः । सोमो॑ दे॒वेष्वा य॑मत् ॥

English Transliteration

sa no bhagāya vāyave vipravīraḥ sadāvṛdhaḥ | somo deveṣv ā yamat ||

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Pad Path

सः । नः॒ । भगा॑य । वा॒यवे॑ । विप्र॑ऽवीरः । स॒दाऽवृ॑धः । सोमः॑ । दे॒वेषु । आ । य॒म॒त् ॥ ९.४४.५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:44» Mantra:5 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:1» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:5


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सदावृधः) जो सदैव सर्वोपरि रहता है और (विप्रवीरः) “वीरयति यद्वा विशेषेण ईर्ते इरयति वा इति वीरः” जो मेधावी पुरुषों को वीर अर्थात् शक्ति प्रदान करके प्रेरणा करता है (सः सोमः) वह परमात्मा (नः भगाय वायवे) हमारे व्याप्तिशील ऐश्वर्य के लिये (देवेषु आयमत्) ज्ञानक्रियाकुशल विद्वानों की शक्तियों को बढ़ाये ॥५॥
Connotation: - कर्म्मयोगी तथा ज्ञानयोगी पुरुषों की शक्तियों के बढ़ाने के लिये परमात्मा सदैव उद्यत रहता है ॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

विप्रवीर सदावृध

Word-Meaning: - (सः) = वह (विप्रवीरः) = विद्वानों में श्रेष्ठ (सोमः) = सोम (देवेषु) = प्राणों में मुख्य प्राण या आत्मा के तुल्य (सदावृधः) = सदा बढ़ानेवाला (नः) = हमें (वायवे) = गतिशील (भगाय) = ऐश्वर्य के लिये (आयमत्) = नियम में चलाता है।
Connotation: - भावार्थ - हम ऐश्वर्य, गतिशीलता, प्राणशक्ति, विद्वत्ता वृद्धि के लिये सोम को धारण करें ।
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सदावृधः) यः सर्वदैव सर्वोत्कृष्टः (विप्रवीरः) यश्च मेधाविपुरुषान् शक्तिमतः कर्तुं प्रेरयति (सः सोमः) स परमात्मा (नः भगाय वायवे) अस्माकं वृद्धिं गच्छत ऐश्वर्याय (देवेषु आयमत्) ज्ञानक्रियाकुशलेषु विद्वत्सु शक्तिं वर्धयतु ॥५॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May Soma, eternal and infinite, inspirer of the holy and brave, come among our noble and generous congregations of yajna and bless us with honour and excellence of a progressive social order vibrant as the winds.