स न॑: पवस्व वाज॒युश्च॑क्रा॒णश्चारु॑मध्व॒रम् । ब॒र्हिष्माँ॒ आ वि॑वासति ॥
English Transliteration
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sa naḥ pavasva vājayuś cakrāṇaś cārum adhvaram | barhiṣmām̐ ā vivāsati ||
Pad Path
सः । नः॒ । प॒व॒स्व॒ । वा॒ज॒ऽयुः । च॒क्रा॒णः । चारु॑म् । अ॒ध्व॒रम् । ब॒र्हिष्मा॑न् । आ । वि॒वा॒स॒ति॒ ॥ ९.४४.४
Rigveda » Mandal:9» Sukta:44» Mantra:4
| Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:1» Mantra:4
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:4
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - जो परमात्मा (बर्हिष्मान् आ विवासति) व्यापकतारूप से सब लोकों को आच्छादन कर रहा है (सः) वह परमात्मा (अध्वरम् चारुम् चक्राणः) हमारे यज्ञ को शोभायमान करता हुआ (नः पवस्व) हमको पवित्र करे ॥४॥
Connotation: - परमात्मा अपनी व्यापक सत्ता से सब लोक-लोकान्तरों को एकदेशी बनाकर व्यापकरूप से स्थिर है। उक्त यज्ञ में उसकी प्रकाशकभाव से प्रकाशित होने की प्रार्थना की गई है ॥४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
'वाज व श्रवस्' का विजेता सोम
Word-Meaning: - हे सोम ! (स) = वह तू (नः) = हमें (पवस्व) = पवित्र करनेवाला है, (वाजयुः) = बल को देनेवाला है, (चारु) = रमणीकता प्रदाता है, (अध्वरम्) = यज्ञ का प्रेरक है (बर्हिष्मान्) = दुरितों को दूर करता हुआ, (चक्राण:) = कर्मशील बनाता है, तथा (आविवासति) = हमारे आच्छादन प्राप्त कराता है।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमें ज्ञान, बल, सौन्दर्य, उज्ज्वल चरित्र प्रदान करता है।
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ARYAMUNI
Word-Meaning: - यः परमात्मा (बर्हिष्मान् आ विवासति) व्यापकतारूपेण सर्वान् लोकान् आच्छादयति (सः) स (अध्वरम् चारुम् चक्राणः) अस्माकं यज्ञं शोभमानं कुर्वाणः (नः पवस्व) अस्मान् पुनातु ॥४॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - O Soma, blissful, watchful and gracious, lover of vibrant aspirants of divine progress, beautifier and sanctifier of our yajna with holiness and grace, the vedi is prepared, the grass is spread, the fire is awake, the yajamana invokes you, adores and glorifies, pray come and bless the celebrants’ yajna.
