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अ॒यं दे॒वेषु॒ जागृ॑विः सु॒त ए॑ति प॒वित्र॒ आ । सोमो॑ याति॒ विच॑र्षणिः ॥

English Transliteration

ayaṁ deveṣu jāgṛviḥ suta eti pavitra ā | somo yāti vicarṣaṇiḥ ||

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Pad Path

अ॒यम् । दे॒वेषु॑ । जागृ॑विः । सु॒तः । ए॒ति॒ । प॒वित्रे॑ । आ । सोमः॑ । या॒ति॒ । विच॑र्षणिः ॥ ९.४४.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:44» Mantra:3 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:1» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:3


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (जागृविः सुतः अयम् सोमः) स्वयंसिद्ध जागरूक यह परमात्मा (विचर्षणिः) सबको देखता हुआ (आ याति) सर्वत्र व्याप्त है और (देवेषु) विद्वानों के (पवित्रे) हृदय में (एति) आर्विभूत होता है ॥३॥
Connotation: - अन्य लोगों की जागृति नैमित्तिकी होती है अर्थात् स्वतःसिद्ध नहीं होती। एकमात्र परमात्मा की जागृति ही स्वतःसिद्ध है अर्थात् परमात्मा ही ज्ञानस्वरूप है, अन्य सब जीव पराधीन ज्ञानवाले हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'जागृवि - विचर्षणि' सोम

Word-Meaning: - (१) (अयम्) = यह सोम (सुतः) = उत्पन्न हुआ हुआ (देवेषु) = देववृत्ति के व्यक्तियों में (जागृविः) = सदा जागरणशील है यह शरीर में रोगों के आक्रमण को नहीं होने देता तथा मन को वासनाओं से आक्रान्त नहीं होने देता। (पवित्रे) = पवित्र हृदयवाले पुरुष में यह (आ एति) = शरीर में समन्तात् गतिवाला होता है । (२) यह (विचर्षणिः) = हमारा विशेषरूप से देखनेवाला, ध्यान करनेवाला (सोमः) = सोम (याति) = शरीर में गति करता है।
Connotation: - भावार्थ-सोम सदा जागरुक रहकर हमारी रक्षा करता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (जागृविः सुतः अयम् सोमः) स्वयम्भूर्जागरूकोऽयं परमात्मा (विचर्षणिः) सर्वं पश्यन् (आ याति) सर्वत्र व्याप्तो भवति (देवेषु) विदुषां (पवित्रे) पवित्रहृदये (एति) आविर्भवति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - This Soma of divine vigour and ecstasy, all watchful, ever awake among the divines, flows free, and when it is invoked for realisation, it moves and rises to bless the holy heart and soul of the celebrant.