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पु॒ना॒नो अ॑क्रमीद॒भि विश्वा॒ मृधो॒ विच॑र्षणिः । शु॒म्भन्ति॒ विप्रं॑ धी॒तिभि॑: ॥

English Transliteration

punāno akramīd abhi viśvā mṛdho vicarṣaṇiḥ | śumbhanti vipraṁ dhītibhiḥ ||

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Pad Path

पु॒ना॒नः । अ॒क्र॒मी॒त् । अ॒भि । विश्वाः॑ । मृधः॑ । विऽच॑र्षणिः । शु॒म्भन्ति॑ । विप्र॑म् । धी॒तिऽभिः॑ ॥ ९.४०.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:40» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:30» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


ARYAMUNI

अब ईश्वर के पास से अच्छे स्वभाव की प्रार्थना करते हैं।

Word-Meaning: - (विचर्षणिः) सर्वद्रष्टा परमात्मा (पुनानः) सत्कर्मियों को पवित्र करता हुआ (विश्वा मृधः अभ्यक्रमीत्) अखिल दुराचारियों का नाश करता है (विप्रं धीतिभिः) उस परमात्मा को विद्वान् लोग वेदवाणियों से (शुम्भन्ति स्तुत्वा) स्तुति करके विभूषित करते हैं ॥१॥
Connotation: - परमात्मा सत्कर्मी पुरुषों को शुभ स्वभाव प्रदान करता है। तात्पर्य यह है कि सत्कर्मियों को उनके शुभकर्म्मानुसार शुभ फल देता है और दुष्कर्मियों को दुष्कर्मानुसार अशुभ फल देता है ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सब शत्रुओं का विनाश

Word-Meaning: - [१] (पुनानः) = हमें पवित्र करता हुआ यह सोम (विश्वाः मृधः अभि) = सब शत्रुओं के प्रति (अक्रभीत्) = आक्रमण करनेवाला होता है। काम-क्रोध-लोभ आदि पर आक्रमण करके यह उन्हें विनष्ट करता है, रोगकृमियों को भी यह आक्रान्त करता है। यह सोम (विचर्षणिः) = हमारा विशेषरूप से देखनेवाला, ध्यान करनेवाला है। [२] (विप्रा:) = अपना विशेषरूप से पूरण करनेवाले ज्ञानी लोग (धीतिभिः) = स्तुतियों व उत्तम कर्मों के द्वारा (शुम्भन्ति) = सोम को शरीर में ही सुशोभित करते हैं। सोमरक्षण में स्तुति साधन बनती है। कर्मों में लगे रहने से ही हम वासनाओं से बचते हैं और सोम को रक्षित कर पाते हैं ।
Connotation: - भावार्थ–सोम हमारे रोग व वासना रूप शत्रुओं पर आक्रमण करता है। इसका रक्षण स्तुति व कर्म में लगे रहने से होता है।

ARYAMUNI

अथ ईश्वरस्य सकाशात् शीलं प्रार्थ्यते।

Word-Meaning: - (विचर्षणिः) यः सर्वद्रष्टा परमात्मा (पुनानः) सत्कर्मिणः पवित्रयन् (विश्वा मृधः अभ्यक्रमीत्) अखिलान् दुराचारान् नाशयति (विप्रं धीतिभिः) तं परमात्मानं विद्वांसः वेदवाग्भिः (शुम्भन्ति स्तुत्वा) विभूषयन्ति ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, spirit of universal purity and purification, all watching, faces and overcomes all adversaries of the carnal world. Sages celebrate and glorify the vibrant all prevailing spirit with songs of adoration.