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सना॒ दक्ष॑मु॒त क्रतु॒मप॑ सोम॒ मृधो॑ जहि । अथा॑ नो॒ वस्य॑सस्कृधि ॥

English Transliteration

sanā dakṣam uta kratum apa soma mṛdho jahi | athā no vasyasas kṛdhi ||

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Pad Path

सना॑ । दक्ष॑म् । उ॒त । क्रतु॑म् । अप॑ । सो॒म॒ । मृधः॑ । ज॒हि॒ । अथ॑ । नः॒ । वस्य॑सः । कृ॒धि॒ ॥ ९.४.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:4» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:7» Varga:22» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:3


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे सौम्यस्वभाव परमात्मन् ! (क्रतुम्) हमारे शुभ कर्म्मों की आप (सन) रक्षा करें (अथ) और (मृधः) पाप कर्म्मों को (अप जहि) हमसे दूर करें (उत) और (दक्षम्) सुनीति और (वस्यसः) मुक्ति सदा (कृधि) करो ॥३॥
Connotation: - जो पुरुष शुद्धभाव से परमात्मपरायण होते हैं, परमात्मा उनके पापकर्म्मों को हर लेता है और नाना प्रकार के चातुर्य्य उनको प्रदान करता है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दक्ष- क्रतु [बल व ज्ञान]

Word-Meaning: - [१] हे सोम ! तू (दक्षं सन) = हमें बल दे । (उत) = और (क्रतुम्) = प्रज्ञान को भी प्राप्त करा । सोम के रक्षण से हम बल व प्रज्ञान से सम्पन्न हों। हमारे क्षत्र व ब्रह्म का विकास होकर हमारा जीवन श्रेष्ठ बने । [२] हे (सोम) = वीर्य ! तू (मृधः) = हिंसक शत्रुओं को (अपजहि) = सुदूर विनष्ट कर । वासनाएँ ही हमारे हिंसक शत्रु हैं। बल व प्रज्ञान के विकास से वासनाओं का विनाश होता है । (अथा) = अब इस वासना विनाश को करके (नः) = हमें (वस्यसः कृधि) = उत्कृष्ट जीवनवाला कर ।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमारे बल व ज्ञान का विकास करके, नानारूप शत्रुओं का नाश करता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सोम) हे सौम्यस्वभाव परमात्मन् ! (क्रतुम्) अस्मच्छुभकर्माणि (सन) रक्षतु (अथ) किञ्च (मृधः) पापकर्म्माणि (अप, जहि) अस्मत्तोऽपनय (उत) अथ (दक्षम्) सुनीतिं (वस्यसः) मुक्तिं (कृधि) कुरु ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Soma, spirit of peace and excellence, give us strength and efficiency, protect and promote our noble actions, and ward off all sin, violence and evil forces, and thus make us happy and successful, more and ever more.