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आ॒शुर॑र्ष बृहन्मते॒ परि॑ प्रि॒येण॒ धाम्ना॑ । यत्र॑ दे॒वा इति॒ ब्रव॑न् ॥

English Transliteration

āśur arṣa bṛhanmate pari priyeṇa dhāmnā | yatra devā iti bravan ||

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Pad Path

आ॒शुः । अ॒र्ष॒ । बृ॒ह॒त्ऽम॒ते॒ । परि॑ । प्रि॒येण॑ । धाम्ना॑ । यत्र॑ । दे॒वाः । इति॑ । ब्रव॑न् ॥ ९.३९.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:39» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:29» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


ARYAMUNI

अब यज्ञ में ज्ञानरूप में परमात्मा का आवाहन कथन करते हैं।

Word-Meaning: - (बृहन्मते) हे सर्वज्ञ परमात्मन् ! (आशुः) आप शीघ्र गतिशील हैं (यत्र देवाः इति ब्रवन्) जहाँ दिव्यगुणसम्पन्न ऋत्विगादि आपका आवाहन करते हैं, उस यज्ञस्थल में आप (प्रियेण धाम्ना पर्यर्ष) अपने सर्वहितकारक तेजस्वरूप से विराजमान हों ॥१॥
Connotation: - यज्ञादि शुभकर्मों में परमात्मा के भाव वर्णन किये जाते हैं, इसलिये परमात्मा की अभिव्यक्ति यज्ञादिस्थलों में मानी गई है। वास्तव में परमात्मा सर्वत्र परिपूर्ण है ॥१॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रिय धाम की प्राप्ति

Word-Meaning: - [१] हे (बृहन्मते) = विशाल बुद्धिवाले पुरुष ! तू (प्रियेण धाम्ना) - = प्रीणित करनेवाले तेज के हेतु (आशु:) = शीघ्रता से कर्मों में व्याप्त होनेवाला होकर (अर्ष) = वहाँ जानेवाला हो, ('यत्र देवा:') = जहाँ देव हैं, (इति ब्रवन्) = ऐसा लोग कहते हैं । [२] सोम का रक्षण होने पर यह शरीर देवों का अधिष्ठान बनता है 'बृहन्मति' उस शरीर में ही स्थित का होने का प्रयत्न करता है, जिसमें कि सोम का रक्षण किया गया है।
Connotation: - भावार्थ - इस सोम के रक्षण से इसे 'प्रिय तेज' प्राप्त होता है, वह शक्ति प्राप्त होती है, जो कि इसे प्रीणित करनेवाली होती है, वस्तुतः सुरक्षित हुआ हुआ यह सोम ही इसे 'बृहन्मति' बनाता है ।

ARYAMUNI

अथ यज्ञविषये परमात्मनो ज्ञानरूपेणाह्वानं कथ्यते।

Word-Meaning: - (बृहन्मते) हे सर्वज्ञ परमात्मन् ! (आशुः) भवान् शीघ्रगतिरस्ति (यत्र देवाः इति ब्रवन्) यत्र दिव्यगुणसम्पन्ना ऋत्विगादयो भवन्तमावाहयन्ति तत्र यज्ञस्थले भवान् (प्रियेण धाम्ना पर्यर्ष) स्वसर्वहितसम्पादकेन तेजोरूपेण विराजताम् ॥१॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, spirit of universal joy and infinite light of intelligence, flow fast forward with your own essential and dear light and lustre of form and come where the divines dwell, and proclaim your presence.