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ए॒ष उ॒ स्य वृषा॒ रथोऽव्यो॒ वारे॑भिरर्षति । गच्छ॒न्वाजं॑ सह॒स्रिण॑म् ॥

English Transliteration

eṣa u sya vṛṣā ratho vyo vārebhir arṣati | gacchan vājaṁ sahasriṇam ||

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Pad Path

ए॒षः । ऊँ॒ इति॑ । स्यः । वृषा॑ । रथः॑ । अव्यः॑ । वारे॑भिः । अ॒र्ष॒ति॒ । गच्छ॑न् । वाज॑म् । स॒ह॒स्रिण॑म् ॥ ९.३८.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:38» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:28» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब प्रकारान्तर से ईश्वर के गुणवर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (एषः स्यः) यह परमात्मा (रथः) गतिशील और (वृषा) सब कामनाओं का देनेवाला (अव्यः) तथा सब का रक्षक है (सहस्रिणम् वाजम्) अनन्तशक्तिसम्पन्न (गच्छन्) होता हुआ (वारेभिः अर्षति) वरणीय विद्वानों द्वारा प्रकाशित होता है ॥१॥
Connotation: - परमात्मा का ज्ञान विद्वानों द्वारा इस संसार में प्रचार पाता है, इस अभिप्राय से परमात्मा ने उक्त मन्त्र में विद्वानों की मुख्यता निरूपण की है ॥१॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रथः अव्यः

Word-Meaning: - [१] (एषः) = यह (उ) = निश्चय से (स्यः) = वह सोम (वृषा) = शक्ति को देनेवाला है। (रथः) = जीवनयात्रा की पूर्ति के लिये रथ के समान है। (अव्यः) = शरीर का रक्षण करनेवालों में उत्तम है। (वारेभिः) = वरणीय धनों के साथ यह (अर्षति) = शरीर में गतिवाला होता है । [२] यह सोम (सहस्त्रिणं वाजम्) = शत संख्यावाली बहुत अधिक (वाजम्) = शक्ति को (गच्छन्) = जाता हुआ होता है। अर्थात् सुरक्षित होने पर यह सोम खूब ही शक्ति को प्राप्त कराता है । अथवा (सहस्रिणम्) = आमोदयुक्त, आनन्दयुक्त बल को यह प्राप्त कराता है।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम जीवनयात्रा की पूर्ति के लिये उत्तम रथ होता है। यह उत्तम रक्षक है । सब वरणीय धनों को प्राप्त कराता है तथा आनन्दयुक्त शक्ति को देता है ।
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ARYAMUNI

अथ प्रकारान्तरेण ईश्वरस्य गुणा उपदिश्यन्ते।

Word-Meaning: - (एषः स्यः) अयं परमात्मा (रथः) गतिशीलः (वृषा) सर्वाभिलाषसाधकः (अव्यः) सर्वस्य रक्षकः (सहस्रिणम् वाजम्) अनन्ताः शक्तीः (गच्छन्) सम्पादयन् (वारेभिः अर्षति) माननीयैर्विबुधैः प्रकाशितो भवति ॥१॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - This Soma spirit of joy in existence, mighty generous, all protective omnipresent mover, extremely charming, creating and giving thousandfolds of wealth, honour and excellence, vibrates by its dynamic presence at the highest and brightest in the heart of choice souls and in choice beauties of existence.