स दे॒वः क॒विने॑षि॒तो॒३॒॑ऽभि द्रोणा॑नि धावति । इन्दु॒रिन्द्रा॑य मं॒हना॑ ॥
English Transliteration
Mantra Audio
sa devaḥ kavineṣito bhi droṇāni dhāvati | indur indrāya maṁhanā ||
Pad Path
सः । दे॒वः । क॒विना॑ । इ॒षि॒तः । अ॒भि । द्रोणा॑नि । धा॒व॒ति॒ । इन्दुः॑ । इन्द्रा॑य । मं॒हना॑ ॥ ९.३७.६
Rigveda » Mandal:9» Sukta:37» Mantra:6
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:27» Mantra:6
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:6
Reads 349 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सः) वह परमात्मा (देवः) दिव्यगुणसम्पन्न है (कविना इषितः) विद्वानों द्वारा प्रार्थित होता है (इन्दुः) परम ऐश्वर्यसम्पन्न है (मंहना) महान् है (इन्द्राय अभि द्रोणानि) विद्वानों के अन्तःकरणों में (धावति) विराजमान होता है ॥६॥
Connotation: - यद्यपि परमात्मा सर्वत्र विद्यमान है, तथापि विद्याप्रदीप से जो लोग अपने अन्तःकरणों को देदीप्यमान करते हैं, उनके हृदय में उसकी अभिव्यक्ति होती है। इस अभिप्राय से यहाँ परमात्मा का विद्वानों के हृदय में निवास करना कथन किया गया है ॥६॥ यह ३७ वाँ और २७ वाँ वर्ग समाप्त हुआ ॥
Reads 349 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
शरीर शोधक सोम
Word-Meaning: - [१] (सः) = वह (देवः) = प्रकाशमय (इन्दुः) = शक्ति को देनेवाला सोम (कविना) = क्रान्तप्रज्ञ समझदार व्यक्ति से (इषितः) = शरीर में प्रेरित हुआ हुआ (द्रोणानि अभि धावति) = शरीर रूप पात्रों को लक्ष्य करके शोधन करनेवाला होता है [धाव् शुद्धौ] । [२] जीवन को शुद्ध बनाकर यह (इन्द्रः) = सोम (इन्द्राय) = इस जितेन्द्रिय पुरुष के लिये (मंहना) = महान् होता है अथवा [मंहते दानकर्मणः] सब वरणीय धनों को देनेवाला होता है। सब वरणीय धनों को प्राप्त कराके यह सोम उस इन्द्र को महान् बनाता है।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम शरीर का शोधन करता है। यह सब वरणीय धनों प्राप्त कराके को हमें महान् बनाता है। 'रहूगण' ही अगले सूक्त में भी सोम का प्रशंसन करता हुआ कहता है-
Reads 349 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सः) स परमात्मा (देवः) दिव्यगुणसम्पन्नः (कविना इषितः) विद्वद्भिः प्रार्थितः (इन्दुः) परमेश्वरः (मंहना) महान् चास्ति सः (इन्द्राय अभि द्रोणानि) विदुषामन्तःकरणेषु (धावति) विराजते ॥६॥ इति सप्तत्रिंशत्तमं सूक्तं सप्तविंशो वर्गश्च समाप्तः ॥
Reads 349 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Self-refulgent generous Soma divine, celebrated by poets, rushes to manifest, brilliant, blissful and great, in the heart of the devotees for the soul’s joy.
