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स नो॒ ज्योतीं॑षि पूर्व्य॒ पव॑मान॒ वि रो॑चय । क्रत्वे॒ दक्षा॑य नो हिनु ॥

English Transliteration

sa no jyotīṁṣi pūrvya pavamāna vi rocaya | kratve dakṣāya no hinu ||

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Pad Path

सः । नः॒ । ज्योतीं॑षि । पू॒र्व्य॒ । पव॑मान । वि । रो॒च॒य॒ । क्रत्वे॑ । दक्षा॑य । नः॒ । हि॒नु॒ ॥ ९.३६.३

Rigveda » Mandal:9» Sukta:36» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:26» Mantra:3 | Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:3


ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पूर्व्य पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले अनादि परमात्मन् ! ((नः ज्योतींषि) आप हमारे ज्ञान को (विरोचय) प्रकाशित कीजिये (नः) और हमको (क्रत्वे दक्षाय हिनु) बलप्रद यज्ञ के लिये उद्यत कीजिये ॥३॥
Connotation: - जो लोग परमात्मज्योति का ध्यान करते हैं, वे पवित्र होकर सदैव कामों में प्रवृत्त रहते हैं ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्योति-क्रतु-दक्ष

Word-Meaning: - [१] हे (पूर्व्य) = पालन व पूरण करनेवालों में उत्तम ! (पवमान) = पवित्र करनेवाले सोम ! तू (नः) = हमारी (ज्योतींषि) = ज्ञान ज्योतियों को (विरोचय) = दीप्त करनेवाला हो । सुरक्षित सोम ज्ञानाग्नि का ईंधन बनता है और इस प्रकार सोमरक्षण से हमारा ज्ञान चमक उठता है। [२] हे सोम ! तू सुरक्षित होने पर (नः) = हमें (क्रत्वे) = शक्ति के लिये तथा (रक्षाय) = [growth] उन्नति के लिये (हिनु) = प्रेरित कर। इस सोम के द्वारा हमारी शक्ति का वर्धन हो। और हम सब प्रकार से उन्नत हो पायें।
Connotation: - भावार्थ- सोम हमारी ज्ञान ज्योति को बढ़ाता है, हमें सशक्त बनाता है और हमारी सब प्रकार से उन्नति का कारण बनता है।

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (पूर्व्य पवमान) हे सर्वस्य पवित्रयितः अनादे परमात्मन् ! त्वम् (नः ज्योतींषि) अस्माकं बुद्धीः (विरोचय) प्रकाशिताः कुरु (नः) अस्मान् (क्रत्वे दक्षाय हिनु) बलदात्रे यज्ञायोद्यताँश्च विधेहि ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Soma, lord of light, peace and joy, pure, purifying and timeless, let the lights of knowledge shine upon us and inspire and motivate us to engage and achieve expertise and success in the science of yajnic creation and production for the common good.