सु॒त इन्द्रा॑य वा॒यवे॒ वरु॑णाय म॒रुद्भ्य॑: । सोमो॑ अर्षति॒ विष्ण॑वे ॥
English Transliteration
Mantra Audio
suta indrāya vāyave varuṇāya marudbhyaḥ | somo arṣati viṣṇave ||
Pad Path
सु॒तः । इन्द्रा॑य । वा॒यवे॑ । वरु॑णाय । म॒रुत्ऽभ्यः॑ । सोमः॑ । अ॒र्ष॒ति॒ । विष्ण॑वे ॥ ९.३४.२
Rigveda » Mandal:9» Sukta:34» Mantra:2
| Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:24» Mantra:2
| Mandal:9» Anuvak:2» Mantra:2
Reads 387 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सुतः सोमः) स्वयम्भू परमात्मा (इन्द्राय) ज्ञानयोगी के लिये (वायवे) कर्मयोगी के लिये (वरुणाय) उपदेशक के लिये (मरुद्भ्यः) विद्वद्गणों के लिये (विष्णवे) अनेक शास्त्रों में प्रविष्ट विद्वान् के लिये (अर्षति) आकर उनके अन्तःकरण में प्राप्त होता है ॥२॥
Connotation: - यद्यपि परमात्मा व्यापक होने के कारण सर्वत्र विद्यमान है, तथापि उसकी अभिव्यक्ति कर्मयोग ज्ञानयोग तथा अन्य साधनों द्वारा जिन लोगों ने अपने अन्तःकरण को निर्मल किया है, उनके हृदय में विशेषरूप से होती है ॥२॥
Reads 387 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
'इन्द्र-वायु-वरुण-मरुत्-विष्णु'
Word-Meaning: - [१] (सुतः) = उत्पन्न हुआ (सोमः) = सोम [वीर्य] (अर्षति) = शरीर के अंग-प्रत्यंग में गतिवाला होता है । उस समय यह (इन्द्राय) = इन्द्रियों को सशक्त बनाने के लिये होता है। (वायवे) = गतिशीलता के लिये होता है। हमें यह बड़ा स्फूर्तिमय बनाता है। (वरुणाय) = यह द्वेष के निवारण के लिये होता है, सोम के रक्षण के होने पर हमारे मनों में द्वेष आदि के भाव नहीं पनपते । (मरुद्भयः) = यह प्राणों के लिये होता है, इस सोम के रक्षण से प्राणशक्ति का वर्धन होता है। [२] और अन्ततः यह (विष्णवे) = [विष् व्याप्तौ ] व्यापक मनोवृत्ति के लिये होता है, हमें उदार और उदार बनाता हुआ प्रभु को प्राप्त करानेवाला होता है। हम जितने जितने विशाल मनवाले बनते जाते हैं, उतना उतना प्रभु के समीप होते जाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें 'सशक्त, गतिशील, निर्देष, प्राणशक्ति सम्पन्न व उदार हृदय' बनाता है।
Reads 387 times
ARYAMUNI
Word-Meaning: - (सुतः सोमः) स्वयम्भूः परमात्मा (इन्द्राय) ज्ञानयोगिने (वायवे) कर्मयोगिने (वरुणाय) उपदेशकाय (मरुद्भ्यः) विद्वद्गणेभ्यः (विष्णवे) अनेकशास्त्रप्रविष्टविदुषे च (अर्षति) आगत्य तत्र भवतामन्तःकरणेषु आविर्भवति ॥२॥
Reads 387 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Soma, physical, psychic and spiritual streams of energy released by divine creativity, flow all round for Indra, men of power, Vayu, men of energy, Varuna, men of judgement, Maruts, men of ambition, and Vishnu, men of knowledge, wisdom and sustaining generosity.
